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कौन हैं 'जंगल की एन्साइक्लोपीडिया' तुलसी गौड़ा: जो नंगे पैर ही पद्मश्री लेने पहुंची, पीएम ने भी झुककर किया प्रणाम, जानें

Thu, 11 Nov 2021 03:41 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तुलसी गौड़ा का जन्म 1944 में कर्नाटक के एक गांव होन्नली स्थित हक्काली जनजाति में हुआ। 11 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। अपनी जिंदगी के दुख और अकेलेपन को दूर करने के लिए ही तुलसी ने पेड़-पौधों का ख्याल रखना शुरू किया।
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तुलसी गौड़ा - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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राष्ट्रपति भवन में इस सोमवार को पद्म पुरस्कारों का वितरण समारोह हुआ। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कई हस्तियों और आम नागरिकों को सम्मानित किया। इनमें कई लोग ऐसे रहे जिन्हें सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए यह पुरस्कार सौंपा गया। हालांकि, पुरस्कार पाने वालों में एक नाम तुलसी गौड़ा का भी रहा, जिन्हें पारंपरिक पोषाक में नंगे पैर राष्ट्रपति भवन में घूमते और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्मश्री लेते तस्वीरें वायरल हो रही हैं। 
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इनमें जो दो तस्वीरें सबसे बेहतरीन हैं, वो दोनों पीएम नरेंद्र मोदी से जुड़ी हैं। एक तस्वीर में तुलसी गौड़ा जब सम्मान लेने जा रही हैं, तब पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उन्हें बैठे-बैठे हाथ जोड़कर प्रणाम करते दिख रहे हैं। दूसरी फोटो में मोदी को निजी तौर पर तुलसी गौड़ा के हाथ थामे और उनसे बातचीत करते देखा जा सकता है। इन फोटोज को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के मन में कौतूहल पैदा हुआ है कि आखिर यह साधारण सी दिखने वाली महिला कौन हैं और उनकी क्या उपलब्धियां हैं, जो उन्हें पद्म पुरस्कार से नवाजा गया। 

कौन हैं तुलसी गौड़ा?
ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि तुलसी गौड़ा कौन हैं। तुलसी गौड़ा का जन्म 1944 में कर्नाटक के एक गांव होन्नली स्थित हक्काली जनजाति में हुआ। पिता के बचपन में ही गुजर जाने के बाद तुलसी ने दिहाड़ी मज़दूर के रूप में काम शुरू किया। वो अपनी मां के साथ एक स्थानीय नर्सरी में काम करती थीं। तुलसी ने अपनी मां के साथ 35 साल तक दिहाड़ी मजदूर के रूप में नर्सरी में काम करना जारी रखा। इस दौरान उनकी कोई औपचारिक शिक्षा तो नहीं हुई, लेकिन नर्सरी में पेड़-पौधों के बीच उन्हें प्रकृति को समझने का काफी अहम मौका मिला।
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11 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। अपनी जिंदगी के दुख और अकेलेपन को दूर करने के लिए ही तुलसी ने पेड़-पौधों का ख्याल रखना शुरू किया। वनस्पति संरक्षण में उनकी दिलचस्पी बढ़ी और वे राज्य के वनीकरण योजना में कार्यकर्ता के तौर पर शामिल हो गईं। साल 2006 में उन्हें वन विभाग में वृक्षारोपक की नौकरी मिली और चौदह साल के कार्यकाल के बाद वे आज सेवानिवृत्त हैं। इस दौरान उन्होंने अनगिनत पेड़ लगाए हैं और जैविक विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

अपने इस अनुभव और समझ के चलते तुलसी गौड़ा ने पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में बहुत बड़ा योगदान दिया। जंगलों में किसी एक तरह के पेड़ के बीच उनकी उत्पत्ति के लिए आवश्यक मदर ट्री की पहचान करने में तुलसी को महारत हासिल है। इसके अलावा उन्हें बीजों की गुणवत्ता पहचानने का भी काफी अनुभव है। 72 साल की तुलसी गिनकर नहीं बता सकती कि पूरी जिंदगी में उन्होंने कितने पेड़ लगाए। 40 हजार का अंदाजा लगाने वाली तुलसी ने करीब एक लाख से भी ज्यादा पेड़ लगाए हैं। अपनी पूरी जिंदगी पेड़ों को समर्पित करने वाली तुलसी को पेड़-पौधों की गजब की जानकारी है। जिसकी वजह से उन्हें जंगल का इनसाइक्लोपीडिया भी कहा जाता है।
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