पुणे भीमा-कोरेगांव हिंसा व एल्गार परिषद की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनआईए ने इस मामले में ड्राफ्ट चार्ज कोर्ट में पेश किया है जिसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र और देश में आतंकी गतिविधियों के लिए दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और टाटा सोशल साइंस इंस्टीट्यूट (टीएसएसआई) के छात्रों की भर्ती की गई थी।
एनआईए का यह बयान इस मामले में गिरफ्तार 16 और छह भगोड़े आरोपियों के संदर्भ में है। हालांकि एनआईए की चार्जशीट में प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश का जिक्र नहीं किया गया है। भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच कर रही एनआईए ने गिरफ्तार और फरार आरोपियों के खिलाफ 15 पन्नों का ड्राफ्ट चार्ज तैयार किया है जिसे विशेष न्यायाधीश डीई कोठालिकर के समक्ष पेश किया गया है।
इस ड्राफ्ट चार्ज में आरोपियों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया है। एनआईए के अनुसार इन पर प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों और विचारधाराओं को बढ़ावा देने, लोगों और छात्रों को लामबंद करने, भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रचने और सरकार को अस्थिर करने के साथ ही देश की संप्रभुता को खतरे में डालने का संगीन आरोप है। एनआईए के अनुसार सभी आरोपित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भाकपा (माओवादी) और उसके प्रमुख संगठनों के सक्रिय सदस्य हैं, जिन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2009 में गैरकानूनी घोषित किया था।