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Dussehra: महज 240 घंटे में 50 हजार करोड़ रुपये का कारोबार, लाखों लोगों को रोजगार, दीवाली पर होगा बंपर व्यापार

सार

बड़े पैमाने पर लाखों छोटे बड़े उत्सवों के माध्यम से पंडाल निर्माण से लेकर मूर्ति निर्माण, सजावट, भोजन, कपड़े, बिजली व्यवस्था, पूजा सामग्री, फल-फूल और सेवाओं से जुड़े विभिन्न व्यवसायों को भारी मात्रा में काम मिला है।
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हमीरपुर बाजार में त्योहारी सीजन के चलते खरीदारी करती महिलाएं
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विस्तार
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देश में पिछले 240 घंटे यानी दस दिन में 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार हो चुका है। फेस्टिवल सीजन में लाखों लोगों को रोजगार मिला है। अब दीवाली पर बंपर व्यापार होने की संभावना है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल आ सकता है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री और दिल्ली की चांदनी चौक सीट से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया, दिल्ली सहित देश भर में अगले एक महीने तक त्योहारों की धूम रहेगी। दस दिन के नवरात्र, दुर्गा पूजा, रामलीला, डांडिया एवं गरबा उत्सवों के आयोजनों एवं विभिन्न वस्तुओं की खरीददारी से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। 
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खंडेलवाल के मुताबिक, कारीगरों, शिल्पकारों और श्रमिकों को बड़े पैमाने पर काम मिला है। दीवाली त्योहार के लिए अगले एक महीने देश में बड़ा व्यापार होगा। पिछले दस दिनों में दुर्गा पूजा, नवरात्रि और रामलीला जैसे अन्य पारंपरिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से जहां भारत की संस्कृति एवं सभ्यता को बढ़ावा मिला है, वहीं दूसरी ओर देश में व्यापार, सर्विस सेक्टर तथा अर्थव्यवस्था भी तेजी से मजबूत हुई है। बड़े पैमाने पर लाखों छोटे बड़े उत्सवों के माध्यम से पंडाल निर्माण से लेकर मूर्ति निर्माण, सजावट, भोजन, कपड़े, बिजली व्यवस्था, पूजा सामग्री, फल-फूल और सेवाओं से जुड़े विभिन्न व्यवसायों को भारी मात्रा में काम मिला है। इसके चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ हुआ है। कैट के अनुमान के अनुसार, पिछले दस दिनों में दिल्ली सहित देश भर में इन उत्सवों के कारण लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है। 

दीवाली त्योहार की खरीदी को लेकर बाजारों में धूम
अब रविवार से अगले एक महीने तक देश भर में दीवाली त्योहार की खरीदी को लेकर बाजारों में काफी धूमधाम रहेगी। कारीगरों और श्रमिकों को बड़ा अवसर मिलेगा। देशभर में दुर्गा पूजा, रामलीला तथा नवरात्रि के पंडालों की भव्य सजावट और मूर्ति निर्माण में बड़ी संख्या में स्थानीय कारीगरों ने भाग लिया। पंडाल निर्माण, बिजली व्यवस्था, सजावट और अन्य सहायक सेवाओं के लिए कारीगरों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिला है।
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विशेष रूप से मूर्ति निर्माण में लगे कलाकारों और कारीगरों के लिए यह समय विशेष लाभकारी साबित हुआ है। इनकी मेहनत और कला ने फेस्टिवल सीजन के आयोजनों को भव्य रूप प्रदान किया है। बाजारों में तेजी और विभिन्न उद्योगों को अच्छा खासा लाभ हुआ है। दुर्गा पूजा, नवरात्रि और रामलीला के दौरान देशभर के बाजारों में उपभोक्ता गतिविधियों में बड़ी तेजी देखने को मिली है। कपड़े, आभूषण, सजावटी वस्तुएं, पूजा सामग्री, बिजली का सामान, साउंड और लाइटिंग तथा खाद्य वस्तुओं से जुड़े कारोबारों ने भारी मुनाफा कमाया है। 

होटल बिजनेस को फायदा
त्योहारी सीजन में विशेष रूप से पारंपरिक और आधुनिक वस्त्रों, आभूषणों, और घरेलू सजावट के सामानों की खरीदारी में उछाल देखा गया है। देशभर में हजारों पंडालों और रामलीलाओं के मंचन से छोटे और मंझोले उद्योगों को काम मिला है। इस सीजन में लघु उद्योगों का विशेष योगदान रहा है। स्थानीय शिल्प कारीगरों का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने रामलीला, दुर्गा पूजा और नवरात्रि के दौरान विभिन्न प्रकार की मूर्तियों व पंडालों की सजावट के लिए अपनी रचनात्मक कला का प्रदर्शन किया है। उनकी कला और कौशल ने इन कार्यक्रमों को अधिक आकर्षक एवं मनमोहक बनाया है। इन कारीगरों को विशेष रोजगार का अवसर मिला, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। रामलीला कार्यक्रमों से पर्यटन और होटल उद्योग को लाभ हुआ है।  रामलीला के भव्य मंचनों ने देशभर के छोटे और बड़े शहरों में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा दिया है। 

रामलीला के आयोजन स्थलों के आसपास के होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन सेवाएं और अन्य पर्यटन सुविधाएं भी फल फूल रही हैं। रामलीला मंचन के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक, इन आयोजनों को देखने पहुंचे। इससे स्थानीय व्यापार को मजबूती मिली है। दुर्गा पूजा, नवरात्रि और रामलीला जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि यह हमारे समाज और अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। लोकसभा सांसद खंडेलवाल ने बताया, इस प्रकार के आयोजनों से स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को बहुत लाभ मिलता है। आगामी त्योहारी सीजन में इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से व्यापार और रोजगार सृजन के अधिक अवसर पैदा होंगे। 

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक, त्योहारी सीजन के कारोबार ने यह साबित किया है कि भारत में मनाए जाने वाले त्योहार, देश के व्यापार एवं आर्थिक चक्र को कैसे घुमाते हैं। गत वर्ष कैट ने इस आयाम को सनातन अर्थव्यवस्था का नाम देते हुए कहा था कि देश के व्यापार के लिए त्योहारों का मनाया जाना बेहद ही महत्वपूर्ण है। बीते वर्ष एक अनुमान के अनुसार, देश में प्रति वर्ष सनातन अर्थव्यवस्था का यह कारोबार लगभग 25 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया था। यह आंकड़ा, देश के कुल रिटेल कारोबार का लगभग 20 प्रतिशत है। यह बेहद स्पष्ट है कि भारत में त्योहार, तीर्थ आदि के कारण बहुत बड़ी धनराशि बाजार चक्र में पहुंचती है। यह राशि, दुनिया के 100 से ज्यादा देशों की जीडीपी से भी ज्यादा है।
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