केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में नौ रैंक पर तैनात अधिकारियों और कर्मियों को डिटेचमेंट अलाउंस मिलेगा। साथ ही, यदि ये कर्मी राशन मनी के हकदार हैं, तो वह भी दिया जाएगा। किसी कर्मी या अधिकारी को यह कहकर किसी एक वित्तीय फायदे से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसे तो पहले से ही दूसरा फायदा मिल रहा है। सभी योग्य कर्मियों को उनका डिटेचमेंट अलाउंस व राशन मनी का भुगतान किया जाएगा।
सिपाही, हवलदार, एएसआई, एसआई, इंस्पेक्टर, सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, सेकंड इन कमांड और कमांडेंट को ये दोनों फायदे मिलेंगे। सीआरपीएफ मुख्यालय में आईजी एडमिनिस्ट्रेशन एमएस भाटिया द्वारा 24 सितंबर को ये आदेश जारी किए गए हैं।
आदेशों के मुताबिक मौजूदा कर्मियों को ये फायदे देने के अलावा जिनका पिछला बकाया है, उसका भुगतान बिना किसी देरी के किया जाएगा। पिछला भुगतान 1998 से देय होगा। सीआरपीएफ की 75वीं बटालियन के सेकंड इन कमांड विक्रम सिंह ने इस बाबत दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। अदालत ने उनके द्वारा रखे गए साक्ष्यों को ठीक पाया और यह आदेश दिया कि सभी योग्य कर्मियों को डिटेचमेंट अलाउंस व राशन मनी एक साथ मिलेगा।
अभी तक जो व्यवस्था चल रही थी, उसमें ये दोनों भत्ते नहीं दिए जा रहे थे। भले ही कोई अधिकारी या कर्मी योग्य है, मगर उसे एक ही भत्ता मिलता था। इन दोनों भत्तों में थोड़ा बहुत अंतर रहता था। यानी डिटेचमेंट अलाउंस, राशन मनी से थोड़ा ज्यादा होता है। ऐसी स्थिति में देखने को मिलता था कि अनेक योग्य कर्मी राशन मनी अलाउंस छोड़ देते थे।
बाद में पता चला कि ये कोई नियम नहीं है। न ही इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोई आदेश दिए हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, बल में ये सब आला अधिकारियों की मनमर्जी का नतीजा था। यदि कोई पूरा डिटेचमेंट अलाउंस ले लेता था तो उसे राशन मनी भत्ता नहीं मिलता था। याचिकाकर्ता विक्रम सिंह ने अदालत के समक्ष यही मुद्दा उठाया था कि इन दोनों भत्तों का आपस में कोई संबंध नहीं है।
ड्यूटी के अनुसार, ये दोनों भत्ते दिए जाते हैं। कोई कर्मी या अधिकारी अपनी बटालियन से बाहर जा रहा है तो उसे डिटेचमेंट अलाउंस मिलता है। राशन मनी, ये तो कर्मी का निवाला है, जो उसे हर सूरत में मिलना तय है। अदालत ने विक्रम सिंह के तर्क को सही मानते हुए आदेश दिया है कि अब सभी योग्य कर्मियों को ये दोनों भत्ते मिलेंगे। इन कर्मियों को एरियर भी मिलेगा।