बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने रविवार को कहा कि 2016 में तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग को सरकार की इसी तरह की योजना को रोकना पड़ा था। उन्होंने ऐप आधारित बस सेवा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। भाजपा नेता के मुताबिक उस समय बीजेपी की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच हुई और यह साबित हुआ था कि केजरीवाल सरकार गुरुग्राम स्थित बस एग्रीगेटर शटल का पक्ष लेने की कोशिश कर रही थी। भाजपा का आरोप है कि इस मामले के सामने आने के बाद ही उस समय के आम आदमी पार्टी नेता आशीष खेतान ने पहले अपना पद, और बाद में पार्टी छोड़ दिया था।
सचदेवा ने आरोप लगाया कि सरकार इस सेवा को दोबारा शुरू कर एक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है। लेकिन यदि सरकार आगे बढ़ती है तो भाजपा इस पर आक्रामक रुख अपनाएगी। उन्होंने कहा कि क्या परिवहन विभाग के नियमों के अनुबंध कैरिज खंड में कोई बदलाव किया गया है? 2016 में एप्प आधारित प्रीमियम बस सेवा को रोकने के पीछे यही कारण सामने आया था कि उस समयअनुबंध कैरिज खंड में ऐसी सेवा का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में बिना बदलाव किए सरकार इस तरह की सेवा शुरू नहीं कर सकती। उन्होंने सरकार से इस मामले पर सफाई देने की मांग की।