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CWC Meeting: सोनिया गांधी बोलीं- केंद्र सरकार की बस एक नीति, बेचो, बेचो, बेचो

Sun, 17 Oct 2021 01:12 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि विदेश नीति के अर्थपूर्ण मसलों पर प्रधानमंत्री मोदी विपक्ष को भरोसे में नहीं लेते हैं। कोरोना टीकाकरण नीति पर राज्यों का दबाव बनाना मोदी सरकार का एक दुर्लभ मामला है।
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कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी। - फोटो : ANI
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विस्तार
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कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद जैसे असंतुष्ट खेमे के नेताओं की मांग पर बुलाई गई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। सरकार की विदेश नीति पर हमला करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि इस मुद्दे पर हमेशा रहने वाली आम सहमति को इसलिए नुकसान पहुंचा है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अर्थपूर्ण मसलों पर विपक्ष को भरोसे में नहीं लेना चाहते।

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उन्होंने ये भी कहा कि देश की विदेश नीति को भी चुनावी ध्रुवीकरण का औजार बना दिया गया है। सोनिया ने कहा, हम अपनी सीमाओं और दूसरे मोर्चो पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले साल विपक्षी नेताओं को कहा था कि हमारी भूमि पर चीन का कोई कब्जा नहीं है। इसके बाद से उनकी चुप्पी ने देश को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

देश की अर्थव्यवस्था की बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार का एकमात्र एजेंडा है, राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचो, बेचो, बेचो। कोरोना की दूसरी लहर के बाद कोविड टीकाकरण नीति में सरकार द्वारा बदलाव का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि ये बदलाव कार्यसमिति की मई में हुई बैठक के तुरंत बाद किया गया। तब राज्य सरकारों ने इस नीति को बदलने का दबाव बनाया था और ये एक दुर्लभ मौका था जब मोदी सरकार ने राज्यों के दबाव में कोई फैसला बदला हो।
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इससे देश को होने वाला लाभ सभी ने देखा है। इसके बावजूद सहयोगी संघवाद केंद्र सरकार के लिए सिर्फ एक नारा ही है और ये सरकार गैर भाजपा शासित राज्य सरकारों को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ती। जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक लोगों की हालिया लक्षित हत्याओं पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इन हत्याओं की कड़ी निंदा की जानी चाहिए और इसके साजिशकर्ताओं से निपटने की पूरी जिम्मेदारी मोदी सरकार पर है।

जम्मू-कश्मीर के लोगों में विश्वास बहाली और सामाजिक शांति और सौहार्द कायम करना भी सरकार की ही जिम्मेदारी है। देश के सामने मौजूद मुद्दों का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कार्यसमिति की ये बैठक लगातार चल रहे किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में हो रही है और तीन कृषि कानूनों को संसद के जरिये जबरन थोपे जाने को लेकर पूरे एक साल हो गए हैं।

लखीमपुर खीरी हिंसा में चार किसानों की मौत की घटना पर सोनिया गांधी ने कहा कि ये घटना बताती है कि किसानों के प्रति भाजपा की सोच क्या है और अपने जीवन और जीविकोपार्जन को बचाने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ किसानों से ये पार्टी किस तरह निपटना चाहती है। कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी के अलावा प्रियंका गांधी वाड्रा, राहुल गांधी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत जी-23 के गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा जैसे नेताओं की भी मौजूदगी रही।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के एम्स में भर्ती होने के कारण और दिग्विजय सिंह और झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह ने अन्य कारणों से बैठक में नहीं लिया। पिछले साल कोविड फैलने के बाद से कांग्रेस कार्यसमिति की ये पहली शारीरिक उपस्थिति वाली बैठक थी। पिछली बैठक ऑनलाइन हुई थी।

संगठनात्मक चुनाव की ये रहेगी प्रक्रिया

कांग्रेस आंतरिक चुनाव से पहले अपने सदस्यता अभियान चलाएगी। इस साल पहली नवंबर से 31 मार्च 2022 तक पांच रुपये में कांग्रेस अपने सदस्य बनाएगी। इसके बाद ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर चुनाव की प्रकिया शुरू की जाएगी। अगले साल पहली जून से 20 जुलाई के बीच जिलों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और कार्यकारी समिति सदस्यों का चुनाव होगा।

21 जुलाई 2022 से 20 अगस्त 2022 के बीच प्रदेश अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, पीसीसी कार्यकारी सदस्यों के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस के सदस्य के लिए पीसीसी जनरल बॉडी का चयन होगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 21 अगस्त से 20 सितंबर के बीच होगा। उसके बाद अक्तूबर के बीच सीडब्ल्यूसी सदस्यों और अखिल भारतीय स्तर की अन्य समितियों का गठन होगा।

चुनावी राज्यों की तैयारियों पर चर्चा

कार्यसमिति की बैठक में पांच राज्यों के चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रभारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग राज्यों की बैठक बुलाकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। बैठक में प्रभारियों ने राज्यों की राजनीतिक परिस्थिति, पार्टी की रणनीति, अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी। जिस पर कुछ सदस्यों की ओर से सुझाव भी आए हैं। सोनिया गांधी ने भी सदस्यों को बताया कि इन चुनावों के लिए पार्टी की तैयारी शुरू हो गई है और तमाम चुनौतियों के बावजूद यदि हम एकजुट, अनुशासित और पार्टी हित के प्रति समर्पित रहे तो जरूर अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

बड़े नेताओं को भी प्रशिक्षण

कांग्रेस का मानना है कि कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं को भी लगातार समय-समय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखकर पार्टी प्रशिक्षण कार्यक्त्रस्म चलाएगी। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी में ऊपर से लेकर नीचे तक बड़े से बड़े नेताओं को प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेना होगा। नियमित तौर पर चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्र में पार्टी की विचारधारा, पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से क्या चाहती है, चुनावी प्रबंधन में उनकी कैसे भूमिका रहेगी जैसे विषयों पर लगातार चर्चा होगी। सबसे पहला प्रशिक्षण शिविर महाराष्ट्र के वर्धा में होगा।
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जमीनी संघर्ष बढ़ाएगी पार्टी

कांग्रेस ने खुद को जन-जन तक पहुंचाने और सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार की है। इसके लिए पूरे देश में जन जागरण अभियान चलाने जा रही है। 15 नवंबर से करीब दो सप्ताह तक चलने वाले जनजागरण अभियान में राज्य, जिला, ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम होंगे। अभियान में पार्टी के सभी विभाग, सहयोगी संगठन शामिल होंगे। पार्टी बूथ स्तर पर पदयात्राएं निकालेगी। इसके लिए प्रदेश स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया जाएगा।
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