वर्तमान में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण ही लू, बढ़ता पारा, पिघलते ग्लेशियर, बाढ़, तूफान जैसी कठोर मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं। इस बीच, सीएसई की हालिया रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इस साल के पहले नौ महीनों में लगभग 86 प्रतिशत दिनों में सामान्य मौसम में गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऐसी घटनाओं से बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां सबसे अधिक मनुष्यों मौत की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
दो मिलियन हेक्टेयर फसल बर्बाद
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा जारी 'एक्सट्रीम वेदर रिपोर्ट 2023' में कहा गया है कि भारत ने इस साल एक जनवरी से 30 सितंबर तक 273 दिनों में से 176 दिनों में कठोर मौसम की घटनाएं दर्ज कीं। इन आपदाओं के कारण साल के पहले नौ महीनों में 2,923 लोगों की मौत हो गई। साथ ही दो मिलियन हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई। वहीं, इसमें यह भी बताया गया है कि आपदाओं के कारण 80 हजार से अधिक घर नष्ट हो गए और करीब 92,000 पशुओं की भी जान चली गई।
नुकसान का अनुमान वास्तविकता से कम
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने यह भी कहा है कि कठोर मौसमी दशाओं के कारण होने वाले नुकसान का यह अनुमान वास्तविकता से कम होगा। क्योंकि क्योंकि प्रत्येक घटना के लिए डेटा एकत्र नहीं किया जाता है, न ही सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान या फसल के नुकसान की गणना की जाती है।
यहां सबसे अधिक मौतें
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कठोर मौसम की घटनाओं की सबसे अधिक संख्या 138 दर्ज की गई। कठोर मौसमी घटनाओं के कारण बिहार में सबसे अधिक 642 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई। इसके बाद हिमाचल प्रदेश में 365 और उत्तर प्रदेश में 341 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश में बाढ़ जैसी कठोर मौसमी घटनाओं के कारण सबसे ज्यादा लोगों के घर नष्ट हो गए। जबकि पंजाब में सबसे ज्यादा पशुओं की मौत दर्ज की गई है।
दक्षिण में केरल में सबसे अधिक मौत
अगर दक्षिण की बात करें तो केरल में 67 दिन कठोर मौसम की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसके कारण सबसे अधिक मौतें (60) देखने को मिलीं। तेलंगाना की 62 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित हुई। इतना ही नहीं बल्कि राज्य में 645 पशु भी प्रभावित हुए। वहीं, कर्नाटक को भयंकर विनाश का सामना करना पड़ा, जिसमें 11 हजार से अधिक घर बर्बाद हो गए।
इन राज्यों की यह रही स्थिति
उत्तर पश्चिम भारत में, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 113 कठोर मौसम वाले दिन थे। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान भी काफी प्रभावित हुए हैं। वहीं, असम ने 102 कठोर मौसम की घटनाओं को दर्ज किया, जिसमें राज्य ने 159 पशुओं को दिए और 48,000 हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो गई। नागालैंड में 1,900 से अधिक घर नष्ट हो गए।
फरवरी ने तोड़े रिकॉर्ड
इस साल जनवरी औसत से थोड़ा गर्म रहा। जबकि इस साल फरवरी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और 122 वर्षों में सबसे गर्म रहा। वहीं, 122 वर्षों में छठा सबसे सूखा महीना था। फरवरी के अलावा अगस्त भी सबसे शुष्क रहा। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने भारतीय मौसम विभाग से जुटाए आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट जारी की है।