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Court Updates: 327 न्यायिक रिक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश; पासपोर्ट नीति पर हाईकोर्ट में सरकार का जवाब

Mon, 13 Nov 2023 07:40 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की न्यायिक रिक्तियों के मामले में अहम निर्देश दिए हैं। तमिलनाडु की निचली अदालतों में 327 रिक्तियां हैं। एक अन्य अहम मामले में सरकार ने पासपोर्ट की नीति के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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तमिलनाडु की निचली अदालतों में 1,369 न्यायिक अधिकारियों की कुल स्वीकृत संख्या में से 327 पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के निर्देश दिये हैं। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने बीते 9 नवंबर को कहा, "इन रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी है।"
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तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) अमित आनंद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, राज्य में जिला न्यायाधीशों, वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश और कनिष्ठ सिविल न्यायाधीश के पदों को भरने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कई अहम निर्देश दिए। बता दें कि शीर्ष अदालत ने देश भर में निचली न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने सहित न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार से संबंधित 2006 की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी से संबंधित मुद्दे पर कई निर्देश पारित किए।

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया न्याय मित्र के रूप में सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक रिक्तियों की संख्या और उन्हें भरने के लिए उठाए गए कदमों पर मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का भी अवलोकन किया। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में न्यायिक अधिकारियों की कुल स्वीकृत संख्या 1,369 है। पीठ ने कहा, ''327 रिक्तियां हैं जो स्वीकृत संख्या का लगभग 23 प्रतिशत है। अदालत ने कहा, ''जिला न्यायाधीश के कैडर में, 349 स्वीकृत पदों में से, 84 खाली हैं। दो और रिक्तियां जोड़ी जाएंगी, जिससे कुल 86 रिक्तियां हो जाएंगी।"
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पीठ ने कहा कि वरिष्ठ सिविल जज के कैडर में 364 की स्वीकृत संख्या में से 77 रिक्तियां हैं। इसमें कहा गया है, "जूनियर सिविल जज के कैडर में, 656 की स्वीकृत शक्ति में से 166 रिक्तियां हैं।" समय सीमा जारी करते हुए, पीठ ने अपने आदेश में कहा, जूनियर सिविल जजों की 166 रिक्तियों को भरने के लिए इस साल 4 और 5 नवंबर को मुख्य लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। प्रक्रिया 31 दिसंबर 2023 को या उससे पहले सकारात्मक रूप से समाप्त हो जाएगी। नियुक्ति आदेश फरवरी 2024 से पहले जारी किए जाएंगे।

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, जिला न्यायाधीश श्रेणी में सीधी भर्ती श्रेणी के तहत 50 रिक्तियों का विज्ञापन किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा समाप्त हो चुकी है। मुख्य लिखित परीक्षा 2 और 3 दिसंबर 2023 को होने वाली है। मौखिक परीक्षा 21 जनवरी 2024 को होनी है। पूरी चयन प्रक्रिया 31 मार्च 2024, से पहले समाप्त हो जाएगी।

इसी तरह, पीठ ने विभिन्न श्रेणियों के तहत जिला न्यायाधीश के पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया की स्थिति पर ध्यान दिया और कहा, "पूरी प्रक्रिया 31 मार्च 2024 से पहले समाप्त हो जाएगी।" पीठ ने केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में निचली न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने के लिए भी इसी तरह के निर्देश पारित किए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ अब झारखंड, महाराष्ट्र और केरल में निचली न्यायपालिका में रिक्तियों और बुनियादी ढांचे के मुद्दों से निपटने के लिए याचिका को 24 नवंबर को सूचीबद्ध किया है। न्यायमित्र वकील गौरव अग्रवाल पीठ की सहायता करेंगे।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI

पासपोर्ट नीति पर हाईकोर्ट में सरकार का जवाब

गृह मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय को लिंग परिवर्तन के बाद लोगों को आसानी से नया पासपोर्ट प्राप्त करने के मामले में नीति बनाने की सलाह दी। दिल्ली उच्च न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय (एमएचए) ने बताया कि विदेश मंत्रालय (एमईए) को एक ऐसी नीति लाने की सलाह दी है जो भारत के बाहर लिंग परिवर्तन सर्जरी कराने वाले लोगों को भी पासपोर्ट हासिल करने में सक्षम बनाएगी। सरकार का कहना है कि ऐसी चिकित्सा प्रक्रियाओं के बाद बायोमेट्रिक्स नहीं बदलता है, ऐसे में बिना किसी कठिनाई के नया पासपोर्ट जारी करने पर विचार करना चाहिए।

अब 19 दिसंबर को होगी सुनवाई
गृह मंत्रालय ने कहा कि ऐसे भारतीय नागरिकों की पहचान बायोमेट्रिक रिकॉर्ड के माध्यम से सत्यापित की जा सकती है जो अधिकारियों के पास पहले से ही उपलब्ध हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नीति लाने से पहले उसे विभिन्न हितधारकों के साथ सुझाव और इसकी तकनीकी व्यवहार्यता की जांच करने के लिए समय चाहिए। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने मामले को 19 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। उच्च न्यायालय एक ट्रांसजेंडर महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने उच्च न्यायालय से गुहार लगाई थी कि अधिकारियों को उसका पासपोर्ट नए नाम और लिंग सहित संशोधित विवरणों के साथ फिर से जारी करने का निर्देश दिया जाए। महिला की दलील थी कि लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद उसकी शक्ल बदल गई थी।
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