मनुष्य समान है लेकिन न्याय तक समान पहुंच नहीं
उन्होंने कहा, बहुत समय हो गया जब दुनिया ने यह घोषणा की कि सभी मनुष्य समान हैं, लेकिन हमें खुद से पूछने की जरूरत है कि क्या हम सभी को न्याय तक समान पहुंच प्राप्त है। व्यवहार में, इसका मतलब है कि कुछ लोग अक्सर कई कारकों के कारण अपनी शिकायतों का निवारण करने में असमर्थ होते हैं।
कानूनी सहायता तक आसान पहुंच में तकनीक की बड़ी भूमिका
मुर्मू ने कहा, उदाहरण के लिए, भारत में उच्च न्यायपालिका की भाषा अंग्रेजी है, जिससे समाज के एक बड़े वर्ग के लिए न्यायिक प्रक्रियाओं को समझना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी वेबसाइट पर विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में फैसले प्रकाशित करना शुरू कर दिया है। कानूनी सहायता संस्थान भी भाषाई अंतर को पाटने में मदद करते हैं। तकनीक कानूनी सहायता तक पहुंच को और अधिक लोकतांत्रिक बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।
जल्द शुरू होना चाहिए कानूनी सहायता का अधिकार : सीजेआई
सम्मेलन में सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा कि कानूनी सहायता का अधिकार जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए। इसके लिए कई देशों के शीर्ष न्यायाधीश सहमत हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को न केवल छात्रों, बल्कि जनता को भी इसके बारे में शिक्षित करने की जरूरत है। नालसा की ओर से आयोजित दो दिवसीय कानूनी सहायता तक पहुंच पर क्षेत्रीय सम्मेलन : वैश्विक दक्षिण में न्याय तक पहुंच को मजबूत करना के समापन सत्र में उन्होंने कहा, सभी मुख्य न्यायाधीशों ने निष्कर्ष निकाला है कि कानूनी सहायता का अधिकार प्रारंभिक चरण से शुरू होना चाहिए, यहां तक कि किसी के गिरफ्तारी से पहले भी।
न्यायमूर्ति ने दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, बांग्लादेश और अन्य देशों की अदालतों की ओर से भारत के प्रसिद्ध फैसलों के उपयोग का भी उल्लेख किया और इसे 'ट्रांस-ज्यूडिशियल संचार' कहा।
अदालती प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए तकनीक का प्रयोग
बैठक में उन्होंने अदालतों को और अधिक सुलभ बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल व कई अन्य तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक कानूनी सहायता प्रदान करने और जरूरतमंद नागरिकों तक समान न्याय की पहुंच को सुनिश्चित करने में निर्णायक साबित होगा।
न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में तकनीक निर्णायक कारक : न्यायमूर्ति कौल
कानूनी सहायता प्रदान करने और जरूरतमंद नागरिकों तक न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में निर्णायक कारक होगा। यह बातें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसके कौल ने मंगलवार को कही। वे राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) द्वारा यहां आयोजित दो दिवसीय पहले 'कानूनी सहायता तक पहुंच पर क्षेत्रीय सम्मेलन: वैश्विक दक्षिण में न्याय तक पहुंच को मजबूत करना' के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि जिस तरह कोविड-19 महामारी के दौरान तकनीक का उपयोग वर्चुअल कोर्ट या ई-कोर्ट के रूप में हुआ। उसी तरह कानूनी सहायता और न्याय तक पहुंच बनाने में तकनीक का उपयोग निर्णायक कारक होगा। भारत में हम न्यायिक व्यवस्था में तकनीक के उपयोग का प्रयास कर रहे हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं में फैसले उपलब्ध कराना सार्थक कदम : अर्जुन मेघवाल
सम्मेलन में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराना सराहनीय कदम है। इसे अन्य देश भी अपना सकते हैं।