स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. उल्हास महाजन ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस प्रभावित रोगियों की संख्या में खतरनाक रूप से वृद्धि हुई है। यह रंगपंचमी समारोह का परिणाम प्रतीत होता है, जहां लोगों ने एक साथ जश्न मनाया था।
साथ ही शहर के कई इलाके में लोग सामाजिक दूरी भी नहीं बनाए रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिबंधों को लेकर लोग अभी भी गंभीर नहीं हैं। उदाहरण के लिए, 'जनता कर्फ्यू' के दिन बड़ी संख्या में लोग जश्न मनाने के लिए सड़क पर निकल पड़े। जब तक हम प्रतिबंधों का पालन नहीं करते, तब तक स्थिति आने वाले दिनों में खराब होगी ही।
इंदौर संभाग के कमिश्नर आकाश त्रिपाठी ने कहा कि अब तक हमारा पूरा ध्यान इस बात पर है कि बीमारी को कैसे फैलने से रोका जाए। साथ ही ये भी सुनिश्चित हो सके कि लोग बीमारी को रोकने के लिए आवश्यक सभी प्रतिबंधों का पालन कर रहे हैं।
यही कारण है कि लॉकडाउन के प्रतिबंधों का पालन कर्फ्यू के प्रतिबंधों के बाद किया गया है। लोगों ने शुरू के दिनों इसे गंभीरता से नहीं लिया। विश्राम के घंटों के दौरान हमने विशेष स्थान पर लोगों की भीड़ की जांच करने के लिए कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं।
जबलपुर में कोरोना वायरस रोगियों के पहले कुछ मामले 20 मार्च को सामने आए थे। इनमें से तीन एक जौहरी के परिवार थे। जो दुबई से लौटे थे और चौथा संक्रमित जर्मनी से लौटा था। बाद में जौहरी के चार कर्मचारी भी कोविड-19 के पॉजिटिव हो गए। मध्यप्रदेश में अन्य कोरोना वायरस मामलों में दो शिवपुरी एक खंडवा और ग्वालियर में पाए हैं।