13 मई 2017 को जब कौरव को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया तब उनकी उम्र महज 40 साल और कुछ महीने थी। इस तरह वे प्रदेश के सबसे कम उम्र के सीनियर लॉयर बने। इससे पहले भी जब उन्हें वर्ष 2009 में उपमहाधिवक्ता और 2012 में अतिरिक्त महाधिवक्ता बनाया गया, तब भी इन पदों तक पहुंचने वालों में उनकी उम्र सबसे कम ही रही।
11 साल में पाया था मुकाम
वर्ष 2001 में एनईएस लॉ कॉलेज जबलपुर से विधि की पढ़ाई करने के बाद कौरव ने अपने मामा वीरेन्द्र चौधरी के साथ जबलपुर से वकालत प्रारंभ की। उन्होंने वर्ष 2006 में स्वतंत्र वकालत शुरू की और 11 साल में ही इस मुकाम तक पहुंच गए थे।
नरसिंहपुर जिले में गाडरवारा तहसील के ग्राम डोंगरगांव में पुरुषेंद्र कौरव का जन्म 4 अक्तूबर 1976 को हुआ था। छात्र जीवन में कौरव का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ाव रहा। वर्ष 2010 में उन्हें एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में विशेष सदस्य आमंत्रित किया गया।