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कोरोना वायरस: दो दिन बाद फिर बढ़े मामले, ऐसे समझिए तीसरी लहर का खतरा टला है या नहीं

Wed, 08 Sep 2021 02:49 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

क्या कोरोना की तीसरी लहर सच में आ गई है जिसकी चेतावनी विशेषज्ञों ने दी थी? दो दिन की राहत के बाद बुधवार को फिर कोरोना मामले बढ़े तो इसकी आशंका भी बढ़ गई। दूसरी तरफ मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर की चेतावनी ने भी डरा दिया है।
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कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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देश में 24 घंटे के अंदर 37,875 नए कोरोना संक्रमित सामने आए हैं। जबकि मंगलवार को यह संख्या 31,222 थी। एक दिन के अंदर 6,653 मामलों की बढ़ोत्तरी ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। मुंबई में साप्ताहिक कोरोना मामलों में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि ने मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि तीसरी लहर आ गई है।

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तो क्या यह मानें कि सच में देश में कोरोना की तीसरी लहर आ गई है। क्योंकि मुंबई में मामले बढ़ रहे हैं, एक समय में जिस केरल मॉडल की सबसे ज्यादा सराहना हुई थी, अभी भारत में रिपोर्ट किए गए कुल मामलों में से आधे से अधिक यहीं से हैं। केरल में एक बड़ी जनसंख्या को कोरोना की वैक्सीन लगने के बावजूद कुल मामलों के सबसे ज्यादा मामले यहीं से हैं। सात सितंबर को इस राज्य से 31 हजार कोरोना के मामले सामने आए हैं। केरल के बाद मुंबई है जहां मामलों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। भारत में कुल कोरोना संक्रमणों का लगभग 80 प्रतिशत मामला इन्हीं दोनों राज्यों से है।

कुछ राज्यों में बढ़ते मामले तीसरी लहर का संकेत
कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केरल और महाराष्ट्र में संख्या बढ़ने की वजह उच्च स्तर का परीक्षण है। वहीं कुछ विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह तीसरी लहर है जिसकी सभी ने भविष्यवाणी की थी। एक सप्ताह पहले एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में आइसीएमआर में महामारी एवं संचारी रोग विभाग के प्रमुख डा. समीरन पांडा ने कहा कि देश में तो तीसरी लहर के कोई सीधे संकेत नहीं मिल रहे हैं लेकिन कुछ राज्यों में संक्रमण के बढ़ते मामले इसकी आहट दे रहे हैं। 
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कोई नया वैरिएंट नहीं आया तो समझिए लड़ाई जीत ली
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल का कहना है कि अब यदि कोरोना का कोई नया वेरिएंट नहीं आया, तो देश में तीसरी लहर नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि अगर डेल्टा वेरिएंट ही रहा और कोई नया वेरिएंट नहीं आया तो यह मान लेना चाहिए कि हमने कोरोना के खिलाफ यह लड़ाई जीत ली है। केरल के बिगड़े हालात पर उन्होंने यह कहा कि जैसे ही केरल में कोरोना काबू में आएगा, दूसरे राज्यों में भी यह कमजोर पड़ जाएगा। 

 

गणेश उत्सव - फोटो : अमर उजाला
गणेश उत्सव में भीड़ न जुटने देना महाराष्ट्र के लिए बड़ी चुनौती
मुंबई में प्रतिदिन कोरोना के 300 से 400 के बीच नए मामले सामने आ रहे हैं। मंगलवार को मुंबई में 353 नए कोरोना के मरीज सामने आए जिससे मुंबई में कोरोना मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 74,7,078 हो गई है। जबकि मुंबई में अब भी 3718 सक्रिय मरीज हैं। महाराष्ट्र सरकार कोरोना की तीसरी लहर की स्थिति का संज्ञान ले रही है। ऐसे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आगामी त्योहारों को देखते हुए लोगों से भीड़-भाड़ नहीं करने की अपील की है।

वहीं मुंबई की किशोरी पेडणेकर ने लोगों को आगाह किया कि मुंबई के लिए अगले 15 दिन काफी अहम साबित होंगे। उन्होंने कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कोरोना की तीसरी लहर के बारे में बात करना बेकार है क्योंकि तीसरी लहर आ चुकी है। 10 सितंबर से राज्य में गणपति उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। यह महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है। इस समय पूरा महाराष्ट्र गणपति उत्सव में डूबा रहता है। जगह-जगह पंडाल बनाए जाते हैं और बड़ी संख्या में भक्त पंडालों और मंदिरों में गणपति के दर्शन के लिए जाते हैं।

ऐसे समय में जब मुंबई महाराष्ट्र के कोविड टैली के शीर्ष पांच में वापस आ गया है तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और स्थानीय अधिकारी इस स्थिति को कैसे संभाले है। फिलहाल गणेश चतुर्थी और अन्य त्योहारों के मद्देनजर मुंबई पुलिस ने एक 'विशेष 13' दस्ते का गठन किया, जो यह सुनिश्चित करेगी कि त्योहारी सीजन के दौरान लोग कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें।

अपडेट के अनुसार, मुंबई पुलिस का नया दस्ता उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा जो मास्क नहीं पहनते हैं और कोविड के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं। इसके अलावा मुंबई पुलिस ने भी गणपति मंडलों से भक्तों के लिए ऑनलाइन दर्शन को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है। मुंबई पुलिस ने कहा कि अगर कोई भक्त पंडाल में ही दर्शन करने को आना चाहता है तो भीड़ से बचने के लिए टोकन सिस्टम और शेड्यूलिंग होनी चाहिए।

केरल में क्या
कोरोना मामलों को लेकर केरल सबसे प्रभावित राज्यों में पहले नंबर है। इस राज्य से बीते एक महीने में रिकॉर्ड मामले मिल रहे हैं। केरल में बकरीद और ओणम के बाद मामलों में तेजी से उछाल आया था। 21 जुलाई को बकरीद थी। इससे पहले और बाद में जब कुछ दिनों के लिए प्रतिबंधों में ढील दी गई थी तो 27 जुलाई को कोरोना के 22000 से अधिक नए केस दर्ज किए गए थे। यह पूरे देश में दर्ज हुए संक्रमण के नए मामलों का लगभग 53 प्रतिशत था।

उसके बाद भी केरल में लगभग हर दिन करीब 20,000 से अधिक मामले आ रहे थे। केरल में 20 मई को एक दिन में संक्रमण के मामले 30,000 के पार चले गए थे। इसी तरह ओणम के बाद भी 26 अगस्त को तीन महीने के अंतराल के बाद एक दिन में कोरोना वायरस के 30,000 से ज्यादा मामले सामने आए थे। दरअसल केरल में कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बीच कोई समय आया ही नहीं। ऐसे में  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और मुंबई की मेयर की चिंता वाजिब है। अक्सर त्योहारों के बाद राज्यों में कोरोना मामले बढ़ने के कई उदाहरण देखने को मिले हैं।
 
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भारत में कोरोना टीकाकरण - फोटो : पीटीआई
पहली लहर में कितने मामले आए थे
30 जनवरी, 2020 को भारत में पहली कोरोना मरीज केरल के त्रिशुर की छात्रा थी जो वुहान में पढ़ती थी। इसका पीक सितंबर 2020 में आया था। भारत में दैनिक मामलों का सात दिन का औसत 16 सितंबर को 93,617 पर पहुंच गया था जो अब तक का सबसे अधिक था। तीन हफ्तों के बाद इस संख्या में गिरावट होनी शुरू हुई। आठ अगस्त को 74,623 मामले सामने आए और उसके बाद केस में और गिरावट होने लगी। कोरोना की पहली लहर ने बुजुर्गों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया था। केंद्र सरकार ने बताया था कि सितंबर के महीने में करीब 10 लाख एक्टिव केस थे। 

दूसरी लहर में स्थिति भयावह थी
कुछ महीनों की मामूली राहत के बाद दूसरी लहर की शुरुआत पिछले साल दिसंबर में हुई। मार्च के बाद अप्रैल तक कोरोना मामलों की संख्या बेतहाशा बढ़ने लगी। दूसरी लहर संक्रामकता के लक्षणों के साथ-साथ गंभीरता के मामले में भी अलग थी। कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हुई थी और संक्रमण तेजी से फैल रहा था। कोरोना की दूसरी लहर पहले के मुकाबले भयावह होने की वजह से दूसरी लहर में भारत दुनिया के पांच सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देशों की सूची में शामिल हो गया था।

इस दौरान अस्पतालों में बेड नहीं थे। ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हो गई थी। दवाइयां नहीं मिल रही थी। कोरोना की दूसरी लहर में युवा लोग ज्यादा संक्रमित हो रहे थे। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अप्रैल में जानकारी दी गई थी कि कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल में एक्टिव मरीजों की संख्या 14 लाख थी। देश में छह मई को देश में कोरोना के सबसे अधिक मामले 4.14 लाख मामले आए थे।

भारत में दूसरी लहर की पीक के दौरान रोज़ाना 4 लाख के कऱीब मामले सामने आए थे, अब औसतन 30 से 40 हज़ार मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना से होने वाली दुनिया में मौतों के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है जहां 4 लाख से अधिक मौतें हुई हैं। भारत के बाद अमेरिका और ब्राज़ील ही ऐसे देश हैं जहां 4 लाख से अधिक मौतें हुई हैं।

तीसरी लहर से बचने के क्या उपाय किए जा रहे हैं
केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की ओर से गठित एक विशेषज्ञ समिति ने हाल ही में कहा था कि देश में सितंबर और अक्टूबर के बीच कभी भी कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका है। तीसरी लहर की चेतावनियों आशंकाओं के बीच भारत ने कोरोना वैक्सीन के उत्पादन और टीकाकरण की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं। भारत में अब तक कोविशील्ड, कोवैक्सीन और रूस की स्पूतनिक V वैक्सीन के इस्तेमाल हो रहा है।

देश में अब तक 53,29,27,201  लोगों कोविड टीकों की पहली खुराक और 16,39,69,127 लोगों को दूसरी खुराक दी गयी है। भारत ने अब जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज़ वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को आख़िरकार मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण की वजह से ही स्थिति बेकाबू नहीं हुई है। 
 
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