फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

COP29: 'वित्त हर चीज का आधार', जानें जलवायु परिवर्तन पर कॉप-29 के मनोनीत अध्यक्ष मुख्तार बाबायेव ने क्या कहा

Thu, 21 Mar 2024 09:32 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कॉप-29 के मनोनीत अध्यक्ष मुख्तार बाबायेव ने कहा कि बढ़ते तापमान के कारण कमजोर समुदाय एक के बाद एक संकट का सामना कर रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्तार बाबायेव, कॉप-29 के मनोनीत अध्यक्ष - फोटो : X/@COP29_AZ
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कॉप-29 के मनोनीत अध्यक्ष मुख्तार बाबायेव ने गुरुवार को कहा कि अजरबैजान में अगले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर बातचीत, धन जुटाने और पार्टियों के बीच विश्वास बनाने का एक अवसर होगी।
विज्ञापन


'कमजोर समुदाय एक के बाद एक संकट का कर रहा सामना'
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्तार बाबायेव ने कहा कि बढ़ते तापमान के कारण कमजोर समुदाय एक के बाद एक संकट का सामना कर रहे हैं। वित्त हर चीज का आधार है और जलवायु कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण प्रवर्तक है। उन्होंने कहा कि कई लोग अपनी जरूरतों और जो उपलब्ध है उसमें बढ़ते अंतर के कारण यूएनएफसीसीसी प्रक्रिया में विश्वास खो रहे हैं। इस दौरान उन्होंने सभी से संसाधन जुटाने के लिए प्रयास करने का आग्रह किया।

जलवायु वार्ता के केंद्र में वित्त- बाबायेव
अपने संबोधन पर बाबायेव ने कहा कि वित्त इस साल जलवायु वार्ता के केंद्र में है। जलवायु वित्त पर एक नए सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य पर बातचीत एक नया रास्ता तय करने, पार्टियों के बीच विश्वास बनाने का एक अवसर है। वैश्विक थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) के शोध के मुताबिक, 2022 में जीवाश्म ईंधन के लिए सार्वजनिक वित्तीय सहायता वैश्विक स्तर पर 1.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई।
विज्ञापन


कार्यान्वयन वित्त पर निर्भर करता है- बाबायेव
बाबायेव ने कहा कि अगर स्पष्ट और मजबूत संकेत भेजा जाता है कि जलवायु लक्ष्यों के लिए अधिक सार्वजनिक और निजी वित्त आवंटित किया जाएगा तो सभी अपनी महत्वाकांक्षाएं बढ़ाने के लिए सशक्त होंगी। देशों को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल प्रगति की आवश्यकता है, लेकिन कार्यान्वयन वित्त पर निर्भर करता है।

भारत सहित विकासशील देश अपनी जलवायु योजनाओं का समर्थन करने के लिए प्रति वर्ष 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहे हैं। अमीर देशों को जलवायु प्रभावों से निपटने के लिए विकासशील देशों को 100 अरब अमेरिकी डॉलर प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता अभी तक पूरी नहीं हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें