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सहकारिता मंत्रालय: गठन को लेकर विपक्ष आशंकित, अमित शाह ने कहा- मोदी सरकार का एजेंडा विकास का

Mon, 12 Jul 2021 04:17 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, अहमदाबाद/पुणे

सार

  • गुजरात के तीन दिवसीय दौरे के पहले दिन अहमदाबाद में शाह ने कहा कि मोदी संभवत: ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए एक प्रणाली तैयार की कि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी विकास कार्य जारी रहें। राजनीति में इतने लंबे अनुभव के दौरान मैंने तीन प्रकार के नेता देखे हैं।
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अमित शाह - फोटो : ANI
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विस्तार
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‘सहकार से समृद्धि’ के सपने को साकार करने के लिए केंद्र द्वारा गठित सहकारिता मंत्रालय को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच विरोधी सुर सामने आने लगे हैं। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को विकासोन्मुख एजेंडे के लिए मोदी सरकार की सराहना की और कहा कि पीएम मोदी ऐसे नेता हैं जो अपने कार्यकाल के बाद भी विकास कार्यों को जारी रखना सुनिश्चित करते हैं।

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सहकारिता मंत्रालय के गठन को लेकर विपक्ष आशंकित, उठाए सवाल
वहीं नवगठित सहकारिता मंत्रालय को लेकर विपक्ष आशंकित है। एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि केंद्र के नए मंत्रालय से कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन वह राज्यों के सहकारिता क्षेत्र में दखलंदाजी नहीं कर सकता है जबकि वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला ने सरकार के नए मंत्रालय के गठन के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष पार्टियों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की।  

गुजरात के तीन दिवसीय दौरे के पहले दिन अहमदाबाद में शाह ने कहा कि मोदी संभवत: ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए एक प्रणाली तैयार की कि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी विकास कार्य जारी रहें। राजनीति में इतने लंबे अनुभव के दौरान मैंने तीन प्रकार के नेता देखे हैं। कुछ ऐसे नेता हैं, जो चीजों को अपनी गति से होने देते हैं और केवल फीता काटने के लिए जाते हैं। कुछ ऐसे नेता भी हैं, जो अपने कार्यकाल के दौरान सबसे अधिक विकास सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
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लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो ऐसा तंत्र बनाते हैं कि उनके जाने के बाद भी विकास जारी रहते हैं और नरेंद्र भाई ऐसा करने वाले संभवत: पहले नेता हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का विकास का एजेंडा है। शाह को नवगठित सहकारिता मंत्रालय का भी प्रभार सौंपा गया है। नया मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा मुहैया कराएगा। यह सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक पहुंचने में मदद करेगा। 

वहीं मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा से स्वीकृत कानूनों में दखल देने का केंद्र को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चा है कि केंद्र सरकार के नए सहकारिता मंत्रालय के गठन से महाराष्ट्र में सहकारिता आंदोलन की राह में रोड़े खड़े होंगे लेकिन ऐसी चर्चाएं बेकार हैं क्योंकि संविधान के अनुसार, प्रदेश में सहकारी कानून बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

महाराष्ट्र  विधानसभा में इसी आधार पर सहकारिता विभाग से संबंधित कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय का विचार कोई नया नहीं है लेकिन केंद्र सरकार राज्यों के सहकारी क्षेत्र में दखल नहीं दे सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, एक राज्य में पंजीकृत सहकारी संस्थान राज्यों के आधीन होते हैं।

केंद्र सरकार द्वारा गठित सहकारिता मंत्रालय बहुराज्य सहकारी संस्थानों के लिए है। एक से अधिक राज्यों में पंजीकृत सहकारी संस्थानों का नियंत्रण एक राज्य नहीं कर सकता है, इस पर नियंत्रण केंद्र ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि वह जब केंद्र में मंत्री थे तब भी उनके पास ऐसा विचार पेश किया गया था। 

सहकारिता मंत्रालय के गठन के लिए केंद्र की आलोचना करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा कि मोदी सरकार का यह कदम असांविधानिक और सांप्रदायिक है। सरकार इसके जरिए केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मजबूत मौजूदगी रखने वाले सहकारी समितियों पर नियंत्रण करना चाहती है।

उन्होंने केंद्र के इस कदम के खिलाफ संघर्ष के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से एकजुट होने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल को इस मुद्दे पर दखल देने के लिए राष्ट्रपति से मुलाकात करनी चाहिए। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता चेन्नीथला ने कहा कि विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर कानूनी विकल्प भी तलाशना चाहिए क्योंकि सहकारी समिति का मामला राज्य का विषय है।

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