बृहस्पतिवार की रात फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद शुक्रवार की सुबह से ही भाजपा और कांग्रेस में विवाद शुरू हो गया। महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस अध्यक्ष सत्यजीत तांबे पाटिल ने फिल्म निर्माताओं सुनील बोहरा और धवल गाडा को पत्र लिखकर चेताया कि रिलीज से पहले उन्हें फिल्म दिखाना होगी।
यदि इसमें आपत्तिजनक दृश्य हुए तो उन्हें हटाना होगा, वरना वो पूरे देश में फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा। पत्र में लिखा है, ‘ट्रेलर को देखकर साफ है कि कांग्रेस पार्टी को बदनाम करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए चेयरपरसन सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी से जुड़े तथ्यों से छेड़छाड़ कर उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया है।
यह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि लोगों को दिखाने से पहले यह फिल्म हमें दिखाई जाए। हम छेड़े गए तथ्यों वाले सीन बदलने या हटाने को कहेंगे और वो कौन से हैं ये हम फिल्म देखने के बाद तय करेंगे। यदि ऐसा नहीं किया गया तो माना जाएगा कि यह सब जानबूझ किया जा रहा है और उस सूरत में हमारे पास देश भर में फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।’
मध्यप्रदेश में फिल्म पर प्रतिबंध नहीं
मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसने फिल्म द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग ने ट्वीट किया कि सरकार द्वारा फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है इसलिए इस बारे में मीडिया रिपोर्टों की बातें तथ्यात्मक नहीं हैं।
the accidental prime minister
''दिल्ली दरबार में एक ही तो चर्चा थी कि डॉ. साहब को पार्टी से हटाएंगे और पार्टी राहुल जी का अभिषेक करेंगी।''
''आप कश्मीर का हल निकालेंगे तो आने वाले प्राइम मिनिस्टर क्या करेंगे।''
''मुझे तो डॉ. साहब भीष्म पितामह जैसे लगते हैं जिनमें कोई बुराई नहीं है पर फैमिली ड्रामा के पीड़ित लगते हैं।''
''परमाणु समझौते की लड़ाई तो हमारे लिए पानीपत की लड़ाई से भी अधिक मुश्किल थी।''
''महाभारत में दो फैमिली थी भारत में तो एक ही है।''
''सौ करोड़ की आबादी वाले देश को ये गिने चुने लोग चलाते हैं। ये देश की कहानी लिखते हैं। ''
अनुपम खेर बोले- कांग्रेस जितना विरोध करेगी उतनी ही पब्लिसिटी मिलेगी
ट्रेलर के संबंध में मनमोहन सिंह का किरदार निभाने वाले अनुपम खेर ने कहा था कि पूर्व पीएम का किरदार निभाना बेहद मुश्किल रहा। खासतौर पर उनकी आवाज। इसके लिए अनुपम खेर ने लगभग 100 घंटे की मनमोहन सिंह की फुटेज देखी। इसके बाद 6-7 माह का समय उन्होंने हामी भरने के लिए लिया। खेर ने कहा, ‘जितना ज्यादा कांग्रेसी इसका विरोध करेंगे, फिल्म को उतनी ही ज्यादा पब्लिसिटी मिलेगी। इस विषय पर किताब 2014 में ही आ गई थी तब कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ।’ उन्होंने कहा कि तथ्यों को बदला नहीं जा सकता है, चाहे वे जलियांवाला बाग के हों या होलोकास्ट (द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में हुए नरसंहार) के। उन्होंने कहा, मैंने राहुल गांधी जी का ट्वीट पढ़ा था, जिसमें उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर बोला था। इसलिए मुझे लगता है कि वे (राहुल) प्रदर्शनकारियों को डांट लगाएं क्योंकि वे गलत कर रहे हैं।
यह मेरे लिए देजा वु मोमेंट (पहले भी देखा जा चुका) हैं। गतवर्ष आपातकाल पर आधारित मेरी फिल्म इंदु सरकार का भी पूरे देश में विरोध हुआ था। ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ एक किताब पर आधारित फिल्म है और जब इस पुस्तक पर विवाद नहीं हुआ, तो फिल्म पर क्यों हो रहा है। - मधुर भंडारकर, फिल्म निर्माता
क्या हम किसी फिल्म को बधाई और शुभकामनाएं नहीं दे सकते? अपनी इच्छा जाहिर नहीं कर सकते...? कांग्रेस स्वतंत्रता की पक्षधर रही है, तो अब वो उसी आजादी पर सवाल क्यों उठा रही है... -राज्यवर्धन सिंह राठौर, केंद्रीय सूचना व प्रसारण राज्यमंत्री
यह भाजपा का खेल है। वह जानती हैं कि उनके कार्यकाल के पांच साल खत्म होने को हैं और जनता को दिखाने के लिए उनके पास कुछ नहीं है, इसलिए वे ध्यान बंटाने के लिए ऐसी तरकीब अपना रहे हैं। लेकिन कुछ हल होने वाला नहीं है।-पीएल पूनिया, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
इस प्रकार के फर्जी प्रचार के बावजूद हम मोदी सरकार से ग्रामीण संकट, भारी बेरोजगारी, नोटबंदी आपदा, त्रुटिपूर्ण जीएसटी और विफल मोदीनॉमिक्स पर सवाल पूछना नहीं रोकेंगे। हम सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी उससे सवाल पूछना रोकेंगे नहीं। -रणदीप सुरजेवाला, मुख्य प्रवक्ता (कांग्रेस)