देश में दिवाली के उत्सव पर होने वाली आतिशबाजी पलभर की खुशी तो देती है, लेकिन सेहत पर इसका बड़ा दुष्प्रभाव होता है। ग्रीन पटाखों को छोड़ अन्य पटाखों में कई तरह के हानिकारक रासायनिक तत्व होते हैं, जो सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं पटाखे कैसे सेहत को क्षति पहुंचा सकते हैं...
महामारी में तो और भी घातक...
डॉ. वेद बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौर में पटाखा जान का दूसरा दुश्मन बन सकता है। कोरोना की चपेट में आ चुके, जिन लोगों को सांस संबंधी तकलीफ अधिक हुई या ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहे या गंभीर रहे उन्हें पटाखों से दूरी बनानी होगी। संक्रमण के कारण फेफड़ों के कार्यक्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इससे पटाखों का धुआं ऐसे लोगों के लिए और नुकसानदेह हो सकता है।
रंगीन पटाखे और कैंसर...
विशेषज्ञों का कहना है कि रंग-बिरंगे पटाखे जब फूटते हैं, तो उसमें से रेडियोएक्टिव युक्त जहरीले तत्व बाहर निकलते हैं। हवा में घुलकर ये दूषित कण भविष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारक बनते हैं।
नवजात के लिए खतरनाक...
मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट की विशेषज्ञ डॉ. प्रीथा जोशी बताती हैं कि पटाखे से निकलने वाला धुआं और दूषित कण नवजातों और आठ साल तक के बच्चों को अधिक नुकसान पहुंचाता है। बच्चों के श्वसन तंत्र को नुकसान होता है। जिन बच्चों को सर्दी, खांसी, जुकाम और एलर्जी की तकलीफ होती है उनके लिए पटाखों का धुआं दुश्मन बन सकता है।
गले और सीने में जकड़न...
पटाखों के दूषित धुएं से गले और सीने में जकड़न हो सकती है। इससे बच्चे को सांस फूलने की तकलीफ के साथ आंख में जलन, उलझन, बेचैनी और घबराहट जैसी तकलीफें हो सकती हैं।
बुजुर्ग रहें सावधान
पटाखे में मौजूद हानिकारक तत्व बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए घातक है। फेफड़ों या सांस संबंधी किसी तरह की तकलीफ से गुजरने वाले लोगों को आतिशबाजी के दौरान बाहर नहीं निकलना चाहिए। दूसरी बीमारियों से ग्रसित लोगों को भी पटाखें के कारण दूषित हुए वातावरण से बचना चाहिए।