कांग्रेस ने उर्दू कवि और शायर 'इमरान प्रतापगढ़ी' को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का चेयरमैन बना दिया है। प्रतापगढ़ी को पार्टी का स्टार प्रचारक माना जाता है। हालांकि उन्होंने मुरादाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे। शायर, इमरान प्रतापगढ़ी की रचनाओं में 'बापू का कातिल कौन है ..? इंदिरा का कातिल कौन है ...?, राजीव को किसने कत्ल किया ..? इस पर संसद क्यूं मौन है,' काफी चर्चा में रही थी।
पार्टी को उम्मीद है कि प्रतापगढ़ी मुस्लिमों को साधने में कामयाब होंगे। वजह, उनका शायराना एवं कवि का अंदाज खासतौर से मुस्लिम युवाओं को पार्टी से जोड़ने में बड़ी मदद कर सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में कांग्रेस पार्टी के लिए 'करो या मरो' की स्थिति है। पिछले दिनों हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन पूरी तरह निराशाजनक रहा है। पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी को अभी तक स्थायी अध्यक्ष नहीं मिल सका है। अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए होने वाली बैठक टल गई है। इसके पीछे कोरोना का हवाला दिया गया है।
पार्टी से जुड़े एक नेता का कहना है कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा मजबूत है। देश के हर हिस्से में हमारे कार्यकर्ता हैं। आज बहुत से राज्यों में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर हो गई है, लेकिन आने वाले दिनों में पार्टी मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी।
आजादी से बाद से लेकर अभी तक मुस्लिम, कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किया गया, राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरु होना, एनआरसी और सीएएए जैसे कई ऐसे मुद्दे रहे हैं, जिनसे मुस्लिम परेशान होते दिखाई दिए। कांग्रेस पार्टी ने इन अवसरों का फायदा उठाने का प्रयास किया है। कांग्रेस पार्टी अब अपने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जरिए मुस्लिमों को साधेगी।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस पद की दौड़ में कई राजनेता भी रहे हैं, लेकिन पार्टी ने सेलिब्रिटी पर भरोसा जताया है। अभी तक पार्टी के इस प्रकोष्ठ का कामकाज देख रहे नदीम जावेद को राहुल गांधी का खास माना जाता है। वे पहले विधायक रह चुके हैं और मौजूदा राजनीति में सक्रिय हैं।
अगर यूपी की बात करें तो हिंदी सिनेमा जगत में काम कर चुके राज बब्बर नहीं चल पाए थे। पार्टी ने उन्हें प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनका हाल देखने के बाद भी पार्टी ने एक शायर पर भरोसा जताया है। पहले इस पद पर राजनीतिक व्यक्ति ही नियुक्त होते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी उन पर भरोसा करती रही है। मौजूदा दौर में पार्टी को एक शायर पर दांव लगाना पड़ रहा है। मतलब, पार्टी के भीतर अभी प्रेक्टिकल का दौर खत्म नहीं हुआ है।