विवादित बयान देने वाले विधायक शर्मन अली अहमद को कांग्रेस ने पार्टी से निलंबित कर दिया है।
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असम कांग्रेस ने विवादित बयान देने के आरोप में जेल में बंद विधायक शर्मन अली अहमद को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया है। उन पर पार्टी का अनुशासन तोड़ने के आरोप लगाए गए हैं। पार्टी महासचिव बबीता शर्मा ने बताया कि असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने विधायक शर्मन के खिलाफ यह कार्रवाई की है।
अहमद पर दरंग जिले में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा पर विवादित बयान देने का आरोप है। शनिवार को पुलिस ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। कामरूप जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विधायक को दो दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इससे पहले असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए विवादित बयान पर तीन दिनों में जवाब मांगा था।
असम की पार्टियों ने किया था विरोध
विधायक के खिलाफ़ कांग्रेस पार्टी में अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग हो रही थी। इसके अलावा ऑल असम स्टूडेंट यूनियन(आसू) और भारतीय जनता युवा मोचा(भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने भी विधायक अहमद के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। प्रदेश में सत्ताधारी दल भाजपा की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद (यह पार्टी असम आंदोलन से निकली थी) ने राज्य में विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन किया। उन्होंने विधायक अहमद के पुतले जलाए।
अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान हुई थी हिंसा
बता दें कि असम की सरकार ने पूरे राज्य में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। इसी क्रम में बीते महीने दरंग जिले के गोरुखुटी में हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में पुलिस फायरिंग से 2 लोगों की मौत हो गई थी और 20 लोग घायल हुए थे।
इस घटना के बाद सत्ताधारी दल के समर्थकों ने आरोप लगाए थे कि असम आंदोलन के समय दरंग 1983 में जिले के सीपाझर क्षेत्र में उपद्रवियों ने आठ लोगों की हत्या कर दी थी। इस मुद्दे पर विधायक शर्मन अली अहमद ने कथित रूप से विवादित बयान देते हुए कहा था कि 1983 में मारे गए आठ लोग शहीद नहीं कातिल थे। वो अल्पसंख्यकों की हत्याओं में शामिल थे। उन आठ लोगों की मौत आत्मरक्षा में हुई घटना थी।