वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की बधाई देने के बाद कांग्रेस सासंद शशि थरूर को खाली आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने तो उन्हें इसके लिए संघ का हमदर्द बता दिया। वहीं, थरूर ने सिलसिलेवार ट्वीट्स में ऐसे लोगों को करारा जवाब दिया और राजनीतिक सभ्यता की याद दिलाई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की बधाई देने पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं, उन्हें देखकर मैं हैरान हूं। थरूर ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर ट्रोल करने से मैं अपनी राजनीतिक शिष्टता नहीं छोड़ दूंगा और आडवाणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे भी जन्मदिन पर बधाई दूंगा।
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केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने एक ट्वीट में कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी को मेरी ओर से जन्मदिन की बधाई पर हो रहे विरोध से मैं स्तब्ध हूं। क्या हमारे राजनीतिक मार्ग से सभ्यता बिल्कुल समाप्त हो गई है? गांधीजी ने हमें अपने राजनीति प्रदिद्वंद्वियों को भी सम्मान देना सिखाया था। ऐसा लगता है कि अब ऐसा करना मुझे संघियों का हमदर्द बना देता है।
'गांधी जी ने पाप से घृणा करने की शिक्षा दी थी, पापी से नहीं'
एक अन्य ट्वीट में थरूर ने कहा कि असल में गांधी जी ने हमें सिखाया था कि पाप से घृणा करनी चाहिए लेकिन पापियों से प्रेम करना चाहिए। अहिंसा बुरा करने वालों के प्रति अच्छा काम करने वाली प्रेम की एक सकारात्मक अवस्था है। अच्छा और बुरा, ये दोनों गांधीवादी शब्द हैं जिनका मैं आसानी से उपयोग नहीं कर सकता लेकिन मैं असहिष्णुता की निंदा करता हूं।
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'जिन्होंने मुझे कभी पढ़ा नहीं है वही मुझको संघी कह सकते हैं'
थरूर ने कहा, 'हां, मैं आडवाणी और नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई देना जारी रखूंगा और इस बात का विरोध करता रहूंगा कि राजनीतिक रूप से वह क्या करते हैं। मेरा 40 साल का लेखन इस बात को स्पष्ट करता है कि मैं किस चीज में विश्वास करता हूं। जिन्होंने मुझे पढ़ा नहीं है केवल वही मुझे संघी कह सकते हैं। मैं उनके लिए अपने मूल्य नहीं छोड़ूंगा।'