भाजपा के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने गुरुवार को सरकार द्वारा लाए गए तीन विधेयकों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक कानून को बदलने और दोबारा तैयार करने का मौका बर्बाद हो गया है। लोकसभा ने बुधवार को तीन विधेयक पारित किए- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक।
पी चितंबरम ने की आलोचना
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, 'क्या सरकार ने सच में अंग्रेजों के औपनिवेशिक आपराधिक कानून को खारिज कर दिया है? आईपीसी के 90-95%, सीआरपीसी के 95% और साक्ष्य अधिनियम के 99% तीन विधेयकों को कट, कॉपी और पेस्ट किया गया है। क्या कोई इससे इनकार या बहस कर सकता है?'
उन्होंने आगे लिखा, 'वास्तव में सरकार ने मूल आईपीसी और साक्ष्य अधिनियम का मसौदा तैयार करने वाले मैकॉले और फिट्ज स्टीफन को अमर कर दिया है। कानून को बदलने और दौबारा तैयार करने का मौका बर्बाद हो गया।'
ये तीनों विधेयक औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता 1860, दंड प्रक्रिया संहिता अधिनियम 1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की जगह लेंगे। बता दें कि इन विधेयकों में भीड़ हिंसा और नाबालिग से दुष्कर्म में फांसी की सजा का प्रावधान है। ट्रायल अदालतों को एफआईआर दर्ज होने के तीन साल में हर हाल में सजा सुनानी होगी। राजद्रोह को खत्म कर, उसकी जगह देशद्रोह को शामिल किया गया है। अपराध कर विदेश भाग जाने वाले या कोर्ट में पेश न होने वालों के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में सुनवाई होगी। सजा भी सुनाई जा सकेगी।