देश की सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकारों को प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण में देरी को लेकर फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि ई-श्रम पोर्टल पर एक महीने के भीतर श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। पंजीकरण होने के बाद श्रमिकों को राशन कार्ड दिए जाएंगे।
अदालत ने पंजीकरण में देरी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया
इसके अलावा शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि जिन राज्यों में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है, वहां प्रवासी श्रमिकों के लिए अनाज की व्यवस्था की जाए। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने राज्यों द्वारा पंजीकरण में देरी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। अदालत ने कहा कि अगर किसी राज्य के द्वारा तय समयावधि में पंजीकरण प्रक्रिया में देरी हुई, तो संबंधित सचिवों को तलब किया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने लगाई फटकार
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीछ ने कहा,‘आखिर क्यों चार महीनों में पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया? ये हद है। चार महीने के बाद भी आप इस प्रक्रिया में लगे हैं और यह कहने का दुस्साहस कर रहे हैं कि दो महीने और चाहिए। हम निर्देश देते हैं कि इस प्रक्रिया को चार सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाए।’ शीर्ष अदालत ने कहा कि अब तक केवल बिहार और तेलंगाना में प्रवासी श्रमिकों की सौ फीसदी पंजीकरण प्रक्रिया संपन्न हुई है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं की तरफ से अदालत में पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कुछ राज्यों ने पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली है लेकिन, कुछ राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने इस प्रक्रिया की शुरुआत तक नहीं की। शीर्ष अदालत में अब इस मामले की सुनवाई 27 अगस्त को होगी।