ऐसे मिला ओमिक्रॉन का सामुदायिक प्रसार
डॉ. गुप्ता बताती हैं कि अध्ययन में यह भी पता चला कि ओमिक्रॉन के 72 (87.8 फीसदी) मरीज पूरी तरह से टीकाकरण करवा चुके थे। 32 (39.1 फीसदी) मरीजों में हमें ट्रेवल हिस्ट्री या फिर क्लोज कॉन्टेक्ट संक्रमण का कारण मिला। जबकि 50 (60.9 फीसदी) में संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल पाया। फिर हर दिन सैंपल में ओमिक्रॉन की मौजूदगी मिलती चली गई और 1.84 से 54 फीसदी तक सैंपल की संख्या बढ़ती चली गई। किसी भी महामारी के सामुदायिक प्रसार का आकलन करने के लिए यह आंकड़े पर्याप्त हैं।
60%समुदाय में मिला वैरिएंट
डिपार्टमेंट ऑफ क्लीनिकल वायरोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. एकता गुप्ता ने बताया कि देश में पहली बार ओमिक्रॉन वैरिएंट पर इस तरह का अध्ययन हुआ है और उसमें सामुदायिक प्रसार की पुष्टि भी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल 25 नवंबर से 23 दिसंबर के बीच 264 नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग में 182 (68.9 फीसदी) में डेल्टा और दूसरे वैरिएंट मिले थे। जबकि 82 (31.06 फीसदी) में ओमिक्रॉन वैरिएंट की मौजूदगी मिली। इनमें 50 (61 फीसदी) रोगियों में हल्के लक्षण मिले थे।
एम्स को मिली हाइब्रिड इम्युनिटी
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों को दिल्ली में हाइब्रिड इम्युनिटी भी मिली। डॉक्टरों ने बताया कि दिल्ली में अब कुछ मामले ऐसे देखने को मिल रहे हैं जो पिछले साल डेल्टा की चपेट में आए और ठीक होने के बाद उन्होंने वैक्सीन लिया। इसके बाद अब वे ओमिक्रॉन संक्रमित हुए हैं। इनमें एम्स के ही स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या शामिल है।
वहीं कुछ मरीजों में यह भी पता चला है कि उन्हें साल 2020, फिर 2021 और अब ओमिक्रॉन का संक्रमण हुआ। इनका टीकाकरण भी हुआ है और अब एहतियात खुराक भी मिलेगी। एम्स ने इस पर चिकित्सीय अध्ययन शुरू कर दिया है। डॉ. एकता गुप्ता ने बताया कि हाइब्रिड इम्युनिटी दिल्ली में बनना शुरू हुई है। इसे फिलहाल सकारात्मक दृष्टिकोण से ही देखा जा रहा है कि लोगों में एंटीबॉडी का स्तर काफी मजबूत हो रहा है।