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COP29: 'जलवायु कार्रवाई और वित्त के बीच दूरी को पाटने का एकमात्र अवसर', कॉप-29 पर राष्ट्रमंडल महासचिव

Sun, 04 Aug 2024 01:11 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस साल संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता की मेजबानी अजरबैजान कर रहा है। स्कॉटलैंड ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सहयोगी के रूप में जीवाश्म-ईंधन उत्पादकों का होना जरूरी है। 
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राष्ट्रमंडल की महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड - फोटो : ANI
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विस्तार
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राष्ट्रमंडल की महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने अजरबैजान के बाकू में होने वाली कॉप-29 जलवायु वार्ता को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि यह वार्ता जलवायु कार्रवाई और वित्त के बीच दूरी कम करने का दुनिया के पास एकमात्र अवसर है, जो देशों के बीच फिर से विश्वास बनाने और जीवन व आजीविका की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

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जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में...
स्कॉटलैंड ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सहयोगी के रूप में जीवाश्म-ईंधन उत्पादकों का होना जरूरी है। बता दें, इस साल संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता की मेजबानी अजरबैजान कर रहा है। अजरबैजान कैस्पियन सागर पर एक छोटा पेट्रोस्टेट है। इसके लगभग सभी निर्यात तेल और गैस हैं।

तापमान की तय सीमा के पास पहुंच रहे हम
उन्होंने आागे कहा, 'तापमान में होती वृद्धि को भी 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मगर हमारे कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सीमा के काफी पास पहुंच गए हैं। हमारा घर, हमारी पृथ्वी सचमुच आग के करीब पहुंच गई है। इस पर कार्रवाई करने की बजाय जलवायु अनुकूलन प्रयासों के लिए आवश्यक वित्त पोषण और उसकी उपलब्ध मौजूदे स्तर के बीच की खाई पहले से कहीं अधिक चौड़ी हो गई है। इन खाइयों को पाटना हमारा कर्तव्य है और कॉप हमारे पास एकमात्र मौका है।'
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उन्होंने कहा कि अमीर देशों ने 2009 में 100 अरब डॉलर देने का वादा किया था। यह समुद्र में केवल एक बूंद के बराबर योगदान है। खैर हमें अभी यह भी नहीं मिला है।

100 अरब जुटाने का था लक्ष्य
जलवायु संकट के लिए ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार अमीर देशों ने 2009 में जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की मदद के लिए 2020 तक प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर जुटाने का संकल्प लिया था। हालांकि, यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है, बाजार दरों पर ऋण के रूप में प्रदान की गई अधिकांश वित्तीय सहायता के साथ, गरीब और कमजोर देशों पर ऋण का बोझ बढ़ रहा है। इन देशों को अब जलवायु संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए खरबों की आवश्यकता है।

यूएनएफसीसीसी की वित्त संबंधी स्थायी समिति के अनुसार, विकासशील देशों द्वारा अपनी राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान या एनडीसी) में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 2030 तक 5.8 ट्रिलियन डॉलर से 11.5 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी।

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