भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने शनिवार को कहा, अदालत का रुख करना पक्षकारों के लिए अंतिम विकल्प होना चाहिए। 40 वर्षों से अधिक समय से कानूनी पेशे में रहने के बाद मेरी सलाह है कि विवाद समाधान के लिए मिडिएशन एवं आर्बिट्रेशन के विकल्प को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हैदराबाद के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रमण ने कहा, मिडिएशन एवं आर्बिट्रेशन रिश्ते को बहाल करने का एक प्रयास है। किसी भी विवाद के समाधान के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारक सही रवैया है। सही दृष्टिकोण से मेरा मतलब है कि हमें अपने अहंकार, भावनाओं, अधीरता को त्याग देना चाहिए। लेकिन एक बार जब ये संघर्ष अदालत में प्रवेश कर जाते हैं तो इस प्रक्रिया में बहुत कुछ खो जाता है।
यह देखते हुए कि कोई भी संघर्षों के बिना दुनिया की कल्पना नहीं कर सकता है उन्होंने कहा, मिडिएशन एवं आर्बिट्रेशन जैसे तंत्र आजकल विवाद समाधान के पसंदीदा तरीके हैं। इससे कई गुना लाभ होता है जैसे कम देरी, कम खर्चीला, प्रक्रिया में पक्षकारों की अधिक भागीदारी, अधिक नियंत्रण, अधिक आरामदायक व सौहार्दपूर्ण वातावरण।
उन्होंने कहा, भारत में कुछ मध्यस्थता केंद्रों की मौजूदगी के बावजूद, भारतीय पक्षकार अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के लिए भारत के बाहर पेरिस, सिंगापुर, हांगकांग, लंदन, न्यूयार्क और स्टॉकहोम जैसे मध्यस्थता केंद्र का विकल्प चुनते हैं, जिसमें भारी खर्च होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय मिडिएशन एवं आर्बिट्रेशन केंद्र की स्थापना से भारत में यह प्रवृत्ति बदल जाएगी।