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मेड इन इंडिया: चेन्नई के सर्जन ने 3डी प्रिंटेड हार्ट वॉल्व डिजाइन किया

Fri, 20 Aug 2021 04:30 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, चेन्नई।

सार

  • अमेरिका से आयातित वाल्व की कीमत 45000-80000 रुपये के बीच
  • कुत्तों, सुअर और भेड़ के उत्तक से निर्माण होगा देसी बायोप्रोस्थेटिक वाल्व
  • पशुपालन योजना के तहत कुत्ते, सुअर, भेड़ के उत्पादन प्रजनन पर जोर  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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शहर के एक सर्जन ने 3डी प्रिंटेड विशेष बायोपॉलिमर हार्ट वाल्व का एक अनूठा प्रोटोटाइप डिजाइन और विकसित किया है। इसका इस्तेमाल वाल्व को बदलने में किया जा सकता है। यह 3डी प्रिंटेड विशेष बायोपॉलिमर हार्ट वाल्व वर्तमान में धातु के घटकों (मैकेनिकल) या पशु ऊतक (बायोप्रोस्थेटिक) से बनता है।

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डॉ संजय चेरियन के अनुसार, विशेष बायोपॉलिमर से बने 3डी प्रिंटेड हार्ट वाल्व, जो मानव ऊतक के समान होते हैं, सीधे हृदय रोगियों में लगाए जा सकते हैं, जिन्हें वाल्व बदलने की आवश्यकता होती है। पशु उत्तक वाल्व के लिए कुत्तों, सुअर और भेड़ की आवश्यकता होती है क्योंकि इनके दिल के वाल्व मनुष्यों के समान है।

वर्तमान में हृदय वाल्व का आयात अमेरिका से होता है और इसकी लागत 45000-80000 रुपये के बीच है। डॉ. चेरियन  ‘मेड इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत इसका निर्माण भारत में ही करना चाहते हैं, जिसकी कीमत अमेरिका से आयातित वाल्व की तुलना में काफी कम होगी। 
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लगभग एक साल से इस परियोजना पर शोध कर रहे डॉ. चेरियन ने कहा, ‘हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमने भारत का पहला 3डी प्रिंटेड हार्ट वॉल्व डिजाइन और विकसित किया है। हम चार अलग-अलग प्रोटोटाइपके साथ आए और यह चौथी पीढ़ी है। ऐसा लगता है कि यह अच्छी तरह से काम कर रहा है।’

उन्होंने कहा कि यह वैज्ञानिक नवाचार सेंटर फॉर ऑटोमेशन एंड स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी), चेन्नई के सहयोग से किया गया था।

डॉ चेरियन ने दावा किया कि 3डी प्रिंटेड हार्ट वॉल्व वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और इम्प्लांट को स्वीकार करने की संभावना में काफी सुधार करेगा। उन्होंने कहा कि ‘वाल्व सर्जरी आधी सदी से अधिक समय से की जा रही है। कई मामलों में मरीज 5 या 10 साल के बाद वाल्व से संक्रमित हो जाते हैं या जानवरों के  ऊतकों से बने वाल्व फट जाते हैं।

अपनी प्रेरणा के बारे में उन्होंने कहा, ‘हम चिकित्सा के क्षेत्र में 3डी प्रिंटिंग की अवधारणा पर व्यापक शोध कर रहे हैं। पहले, 3डी प्रिंटिंग का उपयोग सर्जिकल दृष्टिकोण की योजना बनाने के लिए किया जाता था, विशेष रूप से जटिल प्रक्रियाओं के लिए, ताकि कार्डियक सर्जन और कार्डियोलॉजिस्ट को नेविगेट करने और हृदय रोगों के इलाज के लिए सर्वोत्तम दृष्टिकोण चुनने में मदद मिल सके।’

उन्होंने यह भी कहा कि इस बार, हमने विशेष बायोपॉलिमर का उपयोग करके हृदय वाल्व बनाने के लिए 3डी प्रिंटर का उपयोग करने के अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया जो मानव ऊतक के समान हैं, जिन्हें सीधे हृदय रोगियों में लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस 3डी प्रिंटेड हार्ट वॉल्व को पेटेंट कराने और इसकी बायोकम्पैटिबिलिटी, प्रभावोत्पादकता और टिकाऊपन की पुष्टि करने के लिए परीक्षण की प्रक्रिया जारी है।

कुत्तों, सुअर, भेड़ के दिल के वाल्व मनुष्यों के समान 
बायोपॉलिमर का खुलासा करने से इनकार करते हुए डॉ चेरियन ने कहा, ‘हमें कुत्तों, सुअर या भेड़ के मॉडल जैसे जानवरों पर परीक्षण करने से पहले (प्रयोगशाला में) परीक्षणों की एक श्रृंखला आयोजित करने की आवश्यकता है, जिनके दिल के वाल्व मनुष्यों के समान हैं।’

मानव परीक्षण शुरू करने से पहले इसमें कुछ समय लगेगा, उन्होंने कहा और संकेत दिया कि बाद के चरण में बायोपॉलिमर का खुलासा किया जाएगा। इसके लिए सरकारी पशुपालन योजना के तहत कुत्ते, सुअर, भेड़ के उत्पादन प्रजनन पर जोर दिया जाएगा। 

वर्तमान में अमेरिका से आयातित होते हैं वाल्व 
डॉ चेरियन ने दावा किया कि चूंकि यह अभिनव उत्पाद ‘मेड इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत बनाया जा रहा है, इसलिए इम्प्लांट की लागत भारत में वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले आयातित हार्ट वाल्व की तुलना में बहुत कम होगी। आयातित शल्य चिकित्सा से प्रत्यारोपण योग्य हृदय वाल्व की लागत 45,000 रुपये (यांत्रिक) और पशु ऊतक वाल्व के लिए 65,000-80,000 रुपये के बीच है। वर्तमान में, वे मुख्य रूप से अमेरिका से आयात किए जाते हैं।

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