19 मई 2018 में भी निपाह का पहला मामला कोझिकोड जिले में ही मिला था। एक जून 2018 तक प्रदेश में इस संक्रमण से 17 की मौत हुई थी और 18 मामलों की पुष्टि हुई थी। हालांकि 10 जून को इस संक्रमण के खत्म होने का एलान किया गया था। इसके बाद जून 2019 में कोच्चि में निपाह का एक मामला मिला था। हालांकि इससे संक्रमित 23 वर्षीय छात्र बाद में स्वस्थ हो गया।
काफी खतरनाक है
विशेषज्ञों के मुताबिक, निपाह वायरस काफी खतरनाक है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों में 40 से 75 फीसदी तक की मौत हो जाती है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसका कोई इलाज भी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपाह वायरस को दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस की सूची में शामिल किया है।
संक्रामक समय बहुत लंबा है
निपाह वायरस के खतरनाक होने के और भी कई कारण हैं। इसका इंक्यूबेशन पीरियड यानी संक्रामक समय बहुत लंबा होता है। कभी-कभी तो 45 दिन। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसे इस बारे में पता ही नहीं चलता और ऐसे में वह इस वायरस को और भी लोगों में फैला चुका होता है।
ये हैं लक्षण
संक्रमित मरीजों में तेज बुखार, खांसी, थकान, सांस लेने में तकलीफ, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द और एनसेफिलाइटिस जैसे लक्षण दिख सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एनसेफिलाइटिस होने पर दिमाग में सूजन आ जाती है और ऐसे में मरीज की मौत तक हो सकती है। इस बच्चे को भी एनसेफिलाइटिस हुआ जिसकी वजह से उसकी अस्पताल में भर्ती होने के तीसरे दिन मौत हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि चमगादड़ों में निपाह वायरस प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों के सीधे संपर्क में आता है तो वह निपाह वायरस से संक्रमित हो सकता है। इसके अलावा दूषित भोजन करने से भी यह वायरस इनसान को संक्रमित कर सकता है। दरअसल, इस वायरस से संक्रमित चमगादड़ जब कोई फल खाते हैं, तो अपनी लार को उसी पर छोड़ देते हैं और ऐसे में इनसान जब उस फल का सेवन करता है तो वह भी इस वायरस से संक्रमित हो जाता है। लार के अलावा यह वायरस चमगादड़ के मूत्र और संभावित रूप से चमगादड़ के मल और जन्म के समय तरल पदार्थों में मौजूद होता है।
बचाव के उपाय
खाना खाने से पहले और खाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से जरूर धोएं, दूषित फलों को खाने से बचें, संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें और इस वायरस की वजह से जिनकी मौत हुई हो, उनके शव से भी दूर रहें।
किसी व्यक्ति के कोरोना और निपाह से संक्रमित होने की संभावना कम
केरल के डॉक्टरों का कहना है कि किसी व्यक्ति के कोरोना और निपाह दोनों से संक्रमित होने की संभावना कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि निपाह दूर तक नहीं फैलता है और यह छोटे क्षेत्रों या समूहों तक ही सीमित रहता है। डॉ. टीएस अनीश के अनुसार, निपाह के मामलों की संख्या शायद ही कभी 50 से अधिक हुई हो। साथ ही उन्होंने कहा कि निपाह को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्रालय पहले भी दो बार इसे संभाल चुका है और कोरोना के चलते पहले से ही लोग एहतियात बरत रहे हैं।