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निपाह का खतरा: मृत बच्चे के संपर्क में आए थे 251 लोग, स्वास्थ्य मंत्री जॉर्ज ने कहा- अब तक 11 में मिले लक्षण

Mon, 06 Sep 2021 09:40 PM IST
Jeet Kumar एजेंसी, कोझीकोड।

सार

  • ज्यादा जोखिम वालों को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में किया गया, अन्य लोग आइसोलेशन में
  • निपाह से मृत बच्चे के संपर्क में आए 251 लोग, 54 को ज्यादा जोखिम
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निपाह से मरने वाले लड़के के घर पहुंची केंद्रीय टीम - फोटो : ani
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विस्तार
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केरल के स्वास्थ्य विभाग ने उन 251 लोगों की पहचान कर ली है, जो निपाह वायरस संक्रमण से मृत 12 साल के बच्चे के संपर्क में आए थे। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने सोमवार को बताया कि इनमें से 38 लोगों को कोझीकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। इनमें से 11 लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखे हैं। 

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जॉर्ज ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि संपर्क में आए 251 लोगों में से 129 तो स्वासथ्य कार्यकर्ता हैं। इनमें से 54 को उच्च जोखिम है। इन 54 में से 30 स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं। संपर्क में आए लोगों में बच्चे के परिजन व रिश्तेदार भी हैं।  उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक विशेष लैब बनाई गई है, जिसमें पुणे से आई एनआईवी की टीम भी तैनात की गई है। यहां सोमवार रात से ही निपाह टेस्ट शुरू हो जाएंगे। 

बता दें, केंद्रीय टीम ने रविवार को निपाह वायरस मरने वाले 12 वर्षीय लड़के के घर का दौरा किया और संक्रमण के स्रोत की पहचान करने के लिए आसपास के क्षेत्र से रामबूटन फलों के नमूने एकत्र किए। टीम का मानना है ये फल चमगादड़ से संक्रमित हो सकते हैं।
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विशेषज्ञों ने कहा कि फलों के नमूने से संक्रमण के स्रोत की पहचान करने और यह पुष्टि करने में मदद मिलेगी कि संक्रमण की उत्पत्ति चमगादड़ से हुई थी या नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, निपाह वायरस चमगादड़ों के कारण होता है और संभावित रूप से मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों के लिए भी घातक है। 

एनसीडीसी विशेषज्ञों ने आगे सभी परिवार के लोगों और अन्य को अतिरिक्त सतर्क रहने और कोई परेशानी होने स्वास्थ्य से जुड़े लोगों को जल्द से जल्द सूचित करने की सलाह दी है। केंद्रीय टीम ने स्थानीय लोगों को घरों और आसपास प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए हैं। मृत बच्चे के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने, निगरानी और अन्य चीजों के लिए 16 टीमों का गठन किया गया है। बच्चे को 27 अगस्त को बुखार आया था और उसे स्थानीय क्लीनिक में भर्ती कराया गया। बाद में उसे निजी अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे एमसीएच लाया गया। 

2018 में 17 की गई थी जान, 2019 में फैला था

19 मई 2018 में भी निपाह का पहला मामला कोझिकोड जिले में ही मिला था। एक जून 2018 तक प्रदेश में इस संक्रमण से 17 की मौत हुई थी और 18 मामलों की पुष्टि हुई थी। हालांकि 10 जून को इस संक्रमण के खत्म होने का एलान किया गया था। इसके बाद जून 2019 में कोच्चि में निपाह का एक मामला मिला था। हालांकि इससे संक्रमित 23 वर्षीय छात्र बाद में स्वस्थ हो गया।

काफी खतरनाक है
विशेषज्ञों के मुताबिक, निपाह वायरस काफी खतरनाक है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों में 40 से 75 फीसदी तक की मौत हो जाती है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसका कोई इलाज भी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपाह वायरस को दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस की सूची में शामिल किया है।

संक्रामक समय बहुत लंबा है
निपाह वायरस के खतरनाक होने के और भी कई कारण हैं। इसका इंक्यूबेशन पीरियड यानी संक्रामक समय बहुत लंबा होता है। कभी-कभी तो 45 दिन। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसे इस बारे में पता ही नहीं चलता और ऐसे में वह इस वायरस को और भी लोगों में फैला चुका होता है।

ये हैं लक्षण
संक्रमित मरीजों में तेज बुखार, खांसी, थकान, सांस लेने में तकलीफ, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द और एनसेफिलाइटिस जैसे लक्षण दिख सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एनसेफिलाइटिस होने पर दिमाग में सूजन आ जाती है और ऐसे में मरीज की मौत तक हो सकती है। इस बच्चे को भी एनसेफिलाइटिस हुआ जिसकी वजह से उसकी अस्पताल में भर्ती होने के तीसरे दिन मौत हो गई।
 
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ऐसे फैलता है वायरस

विशेषज्ञों का कहना है कि चमगादड़ों में निपाह वायरस प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों के सीधे संपर्क में आता है तो वह निपाह वायरस से संक्रमित हो सकता है। इसके अलावा दूषित भोजन करने से भी यह वायरस इनसान को संक्रमित कर सकता है। दरअसल, इस वायरस से संक्रमित चमगादड़ जब कोई फल खाते हैं, तो अपनी लार को उसी पर छोड़ देते हैं और ऐसे में इनसान जब उस फल का सेवन करता है तो वह भी इस वायरस से संक्रमित हो जाता है। लार के अलावा यह वायरस चमगादड़ के मूत्र और संभावित रूप से चमगादड़ के मल और जन्म के समय तरल पदार्थों में मौजूद होता है।

बचाव के उपाय
खाना खाने से पहले और खाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से जरूर धोएं, दूषित फलों को खाने से बचें, संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें और इस वायरस की वजह से जिनकी मौत हुई हो, उनके शव से भी दूर रहें।

किसी व्यक्ति के कोरोना और निपाह से  संक्रमित होने की संभावना कम
केरल के डॉक्टरों का कहना है कि किसी व्यक्ति के कोरोना और निपाह दोनों से संक्रमित होने की संभावना कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि निपाह दूर तक नहीं फैलता है और यह छोटे क्षेत्रों या समूहों तक ही सीमित रहता है। डॉ. टीएस अनीश के अनुसार, निपाह के मामलों की संख्या शायद ही कभी 50 से अधिक हुई हो। साथ ही उन्होंने कहा कि निपाह को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्रालय पहले भी दो बार इसे संभाल चुका है और कोरोना के चलते पहले से ही लोग एहतियात बरत रहे हैं।
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