एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) का गठन करने के लिए राज्यों के साथ आम सहमति पर पहुंचने के लिए केंद्र सरकार नए सिरे से प्रयास कर सकती है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने रविवार को आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा कि एआईजेएस की स्थापना को केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और विभिन्न राज्यों के कानून मंत्रियों के साथ प्रस्तावित एक अहम बैठक के एजेंडा का हिस्सा बनाया जा सकता है। इस बैठक का आयोजन इसी साल नवंबर में किया जा सकता है।
एआईजेएस को लेकर केंद्र का है ये रुख
अभी तक इस बैठक के एजेंडा को लेकर केवल न्यायिक बुनियादी ढांचे (ज्यूडिशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर) का एलान किया गया है। केंद्र का मानना है कि ठीक तरह से बनाया गया एआईजेएस देश की समग्र न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
एआईजेएस, एक अखिल भारतीय योग्यता चयन प्रणाली के जरिए योग्य और नई कानूनी प्रतिभाओं को शामिल करने का अवसर प्रदान करेगा। यह समाज के वंचित वर्गों के लिए उपयुक्त प्रतिनिधित्व सक्षम करके सामाजिक समावेशन का मुद्दा भी संबोधित करेगा।
आजादी के तुरंत बाद पेश हुआ था प्रस्ताव
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की तरह ही एआईजेएस का प्रावधान भी आजादी के तुरंत बाद पेश हुआ था। 1976 में 42वें संशोधन के जरिए संविधान के अनुच्छेद 312 में एआईजेएस का प्रावधान शामिल किया गया था।
फिलहाल व्यवस्था यह है कि विभिन्न हाईकोर्ट और राज्य सेवा आयोग, न्यायिक अधिकारियों की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित रवाते हैं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) निचली अदालतों के लिए न्यायाधीशों की भर्ती के लिए मानक प्रवेश परीक्षा करा सकता है।