चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत की परमाणु नीति हमेशा से ही विशिष्ट रही है, जिसकी विशेषता 'पहले इस्तेमाल न करने' और 'बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई' के सिद्धांतों के पालन करने की रही है। सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज (CAPS) की एक सेमिनार में बोलते हुए जनरल चौहान ने पारंपरिक युद्ध का बदलता स्वरूप और विभिन्न वैश्विक क्षेत्रों में उभर रही भू-राजनीतिक अस्थिरता पर विस्तार से चर्चा की।
'परमाणु रणनीति: समकालीन विकास और भविष्य की संभावनाएं' शीर्षक से अपने संबोधन के दौरान जनरल चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु हथियारों से उत्पन्न खतरा मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में एक बड़ी चिंता के रूप में फिर से उभरा है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, उन्होंने दोहराया कि भारत का परमाणु कार्यक्रम 'पहले इस्तेमाल न करने' की नीति के पालन और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई के सिद्धांत के कारण विशिष्ट बना हुआ है।
जनरल चौहान ने नए सैन्य सिद्धांत विकसित करने की महत्वपूर्ण जरूरतों पर बल दिया। उन्होंने प्रतिरोधक क्षमताओं को बनाए रखने और देश के 'परमाणु C4I2SR' बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिसमें कमांड, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर, खुफिया, सूचना, निगरानी और टोही प्रणालियां शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि 1998 में भारत के पांच परमाणु परीक्षणों के बाद देश ने अपना परमाणु सिद्धांत तैयार किया। 1999 में आधिकारिक रूप से जारी इस सिद्धांत ने भारत की 'पहले इस्तेमाल न करने' की नीति के प्रति प्रतिबद्धता की घोषणा की। इस नीति में जोर दिया गया है कि भारत परमाणु हमला करने वाला पहला देश नहीं होगा, लेकिन उसके खिलाफ किसी भी परमाणु हमले के जवाब में बड़े पैमाने पर जवाबी हमला करने का अधिकार बरकरार रहेगा।
जनरल चौहान की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय सैन्य शक्ति और परमाणु प्रतिरोध में महत्वपूर्ण बदलाव देख रहा है। उनके विचार मौजूदा चुनौतियों के अनुकूल होने के महत्व को रेखांकित करते हैं, साथ ही उन मूलभूत सिद्धांतों के प्रति अडिग रहना भी है, जो दशकों से भारत के परमाणु रुख को परिभाषित करते रहे हैं। प्रतिरोध बढ़ाने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने पर जारी जोर तेजी से अस्थिर होती दुनिया में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
चूंकि भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, इसलिए भारत की अपने परमाणु सिद्धांतों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता और उसके सामरिक सिद्धांतों का निरंतर विकास आने वाले वर्षों में देश की रक्षा और सुरक्षा नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।