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CDS Helicopter Crash: हेलिकॉप्टर हादसे की जांच रिपोर्ट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी, कारणों से लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा

Wed, 05 Jan 2022 11:38 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

CDS chopper crash inquiry report: आठ दिसंबर को हुए हादसे में देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत 13 सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी। तमिलनाडु के कुन्नूर के समीप हुए इस हादसे की जांच तीनों सेना की संयुक्त समिति ने की थी।
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सीडीएस हेलीकाप्टर दुर्घटना जांच रिपोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पिछले माह हुए सेना के हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर वायुसेना ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में हादसे को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य व सिफारिशें हैं। इसका विस्तृत प्रजेंटेशन भी रक्षा मंत्री को दिया गया। इसमें हादसे के कारणों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। 

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आठ दिसंबर को हुए हादसे में देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत 13 सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी। तमिलनाडु के कुन्नूर के समीप हुए इस हादसे की जांच तीनों सेना की संयुक्त समिति ने की थी। जांच रिपोर्ट में दुर्घटना के कारणों को लेकर समिति ने अपने नतीजों से राजनाथ सिंह को अवगत कराया है। इसमें वीआईपी उड़ान के लिए भविष्य के हेलिकॉप्टर संचालन के लिए सिफारिशें भी की हैं।

जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जांच समिति ने रूस में निर्मित Mi-17V5 helicopter हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की जांच पहले ही पूरी कर ली थी। पहले सूत्रों ने कहा था कि भारतीय वायु सेना का उक्त हेलिकॉप्टर किसी तकनीकी त्रुटि के कारण हादसे का शिकार नहीं हुआ। हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दुर्घटना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की अध्यक्षता एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह ने की।  
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भारतीय वायु सेना के अधिकारी एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता वाली ट्राई-सर्विस जांच समिति ने हादसे की जांच की। भारतीय नौसेना के एक वरिष्ठ हेलिकॉप्टर पायलट दुर्घटना की जांच का हिस्सा थे और उन्होंने जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच समिति ने रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों को ले जाने वाले हेलिकॉप्टरों के संचालन के दौरान मानक संचालन प्रक्रियाओं को संशोधित करने के लिए कुछ सिफारिशें भी की हैं।

दुर्घटना के विवरण को लेकर सूत्रों ने कहा कि Mi-17V5 पहाड़ियों में एक रेलवे लाइन के पास उड़ रहा था, तभी वे अचानक उभरे घने बादल में घुस गए। सूत्रों ने कहा कि हेलिकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़ रहा था और इलाके को जानने के बाद यह जानकारी सामने आ रही है कि बावजूद इसके चालक दल ने विमान उतारने का फैसला नहीं किया। ऐसे में विमान एक चट्टान से टकरा गया।

'मास्टर ग्रीन' श्रेणी का था चालक दल
सूत्रों के अनुसार चूंकि पूरा चालक दल 'मास्टर ग्रीन' श्रेणी का था, ऐसा लगता है कि उन्हें भरोसा था कि वे स्थिति से बाहर निकलने में सक्षम होंगे, क्योंकि आपात स्थिति का सुझाव देने के लिए ग्राउंड स्टेशनों पर कोई कॉल नहीं किया गया। सूत्रों ने कहा कि तीन बलों के परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर बेड़े में सर्वश्रेष्ठ पायलटों को 'मास्टर ग्रीन' श्रेणी दी जाती है। इन पायलटों को कम दृश्यता में विमान उड़ाने और उतारने में महारत हासिल होती है।

इसके अलावा, जांच समिति द्वारा की गई सिफारिशों में कहा गया है कि भविष्य में, चालक दल में मास्टर ग्रीन और अन्य श्रेणी के पायलट होने चाहिए, ताकि यदि आवश्यक हो, तो वे जमीन पर स्टेशन से मदद ले सकें। एयर मार्शल एम सिंह की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने कई अन्य सिफारिशें भी की हैं।

हादसे में 13 सैन्य अधिकारियों के अलावा जनरल रावत की पत्नी मधुलिका रावत की भी मृत्यु हो गई थी। मृतकों में रावत के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह और ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह शामिल थे। 

मानवीय चूक या साजिश की आशंका नहीं, खराब मौसम के चलते हुआ हादसा
तमिलनाडु के कुनूर की पहाड़ियों में 8 दिसंबर को किसी तकनीकी गड़बड़ी, मानवीय चूक या साजिश के कारण नहीं, बल्कि खराब मौसम के चलते वायुसेना का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को बुधवार को सौंपी गई वायुसेना की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी, रक्षा सचिव अजय कुमार और कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के प्रमुख एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह ने 45 मिनट की एक प्रस्तुति में हादसे की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के निष्कर्षों की विस्तृत रिपेार्ट रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी। इसमें कुछ सुझाव भी दिए गए।

ऐसे हुआ हादसा : रेललाइन के साथ भर रहे थे उड़ान
हादसे से पहले एमआई-17वी5 हेलिकॉप्टर के पायलट ग्रुप कमांडर वरुणप्रताप सिंह रेलवे लाइन के साथ-साथ उड़ान भर रहे थे। अचानक घने बादल आ गए। हेलिकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़ रहा था और पहाड़ियों की अच्छी समझ होने के कारण चालक दल ने लैंडिंग के बजाय बादलों से होकर गुजरने का फैसला किया। इस दौरान हेलिकॉप्टर एक खड़ी चट्टान से टकरा गया।

ग्राउंड स्टेशन को नहीं दी थी भटकने की जानकारी
हेलिकॉप्टर मास्टर ग्रीन श्रेणी के पायलट उड़ा रहे थे और उन्हें पूरा भरोसा था कि वे बादलों से गुजर जाएंगे। उनकी ओर से ग्राउंड स्टेशन को भटकने की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। मास्टर ग्रीन श्रेणी सर्वश्रेष्ठ पायलटों को दी जाती है।
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दूसरी श्रेणी के पायलटों को भी शामिल करने की सिफारिश
रिपोर्ट में वीवीआईपी को ले जा रहे हेलिकॉप्टरों में अन्य श्रेणी के पायलटों को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है। ताकि जरूरत पड़ने पर वे ग्राउंड स्टेशन से मदद मांग सकें।
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