'रिश्वत के बदले सवाल' पूछने के आरोपों के चलते लोकसभा से निष्कासित की गई टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा की मानहानि वाली याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका में उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्राई पर मानहानि के आरोप लगाये हैं। साथ ही मांग की है कि दोनों को उनके खिलाफ कोई भी कथित फर्जी और अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने या प्रसारित करने से रोका जाए।
इस मामले में हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा, निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्राई के वकील की दलीलों को सुनने के बाद अंतरिम आवेदन पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इस दौरान, हाईकोर्ट ने यह पूछा कि क्या महुआ मोइत्रा और व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के बीच कोई लेन-देन हुआ था।
वकीलों ने दी ये दलीलें
मामले में सुनवाई के दौरान देहाद्राई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय घोष और निशिकांत दुबे का पक्ष रख रहे वकील अभिमन्यु भंडारी ने दावा किया कि मोइत्रा को अपने व्यावसायिक हितों के पक्ष में सवाल पूछने के लिए हीरानंदानी से उपहार और अन्य लाभ मिले थे। दोनों वकीलों ने अपनी दलील में लोकसभा आचार समिति की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। वहीं, मोइत्रा के वकील ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें हीरानंदानी से उपहार मिले थे क्योंकि वे उनके दोस्त थे, न कि संसद में सवाल पूछने के लिए रुपये दिए गए थे। वकील ने दावा किया कि देहाद्राई और दुबे अभी भी मोइत्रा के खिलाफ मानहानिकारक बयान दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से उन्हें ऐसा करने से रोकने का आग्रह किया।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर संसद में अदाणी समूह से संबंधित सवाल पूछे। दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से पैसे लिए थे। भाजपा सांसद ने इसके खिलाफ लोकसभा स्पीकर से शिकायत कर जांच की मांग की। लोकसभा स्पीकर ने मामले को संसद की एथिक्स कमेटी के पास भेज दिया था। निशिकांत दुबे को महुआ मोइत्रा के खिलाफ आरोपों की जानकारी जय अनंत देहाद्रई ने ही दी थी। महुआ मोइत्रा ने इन आरोपों को आधारहीन और मानहानिकारक बताया है। इसके बाद मोइत्रा ने दुबे और देहादराई को कानूनी नोटिस भेजा और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट में दोनों के खिलाफ अक्तूबर में मानहानि का मामला दायर किया था।
अपनी याचिका में उन्होंने दुबे, देहाद्राई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, सर्च इंजन गूगल, यूट्यूब और 15 मीडिया हाउसों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी। साथ ही महुआ ने मांग की थी कि इन सभी को उनके खिलाफ अपमानजनक, प्रथम दृष्टया झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयान बनाने, प्रकाशित करने और प्रसारित करने से रोका जाए। साथ ही उन्होंने हर्जाने की भी मांग की थी।
महुआ ने मीडिया घरानों के खिलाफ मानहानि मामला वापस लिया
हालांकि बाद में, महुआ मोइत्रा ने ‘सवाल के बदले नकदी’ मामले में मीडिया घरानों के खिलाफ मानहानि मामला वापस ले लिया था। जस्टिस सचिन दत्ता को मोइत्रा के वकील ने बताया था कि वह सिर्फ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्राई के खिलाफ मुकदमा चलाएंगी।