'फाइनेंशियल टाइम्स' की मंगलवार की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब भारत ने कनाडा को अपने तीन दर्जन से ज्यादा राजनयिकों को वापस बुलाने को कहा है। हालांकि, कनाडा द्वारा भारत के इस संचार का पालन किया जाना बाकी है। कनाडा के भारत में 62 रायनिक तैनात हैं।
इस कथित बैठक के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, कनाडा की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जयशंकर न्यूयॉर्क की पांच दिवसीय यात्रा के बाद 27 से 30 सितंबर तक वॉशिंगटन डीसी में थे।
खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप निजर की हत्या जून 2023 में की गई थी। पिछले महीने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट शामिल थे। इसके कनाडा ने भारत के एक शीर्ष राजनयिक को निष्कासित किया। जवाब में भारत ने भी कनाडा के एक राजनयिक को निष्कासित कर दिया।
यही नहीं, भारत ने कनाडा में अपनी वीजा सेवा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। साथ ही उसे भारत से अपने राजनयिकों की संख्या को कम करने को कहा। भारत ने कनाडा के आरोपों को (राजनीति से) 'प्रेरित' और 'बेतुका' बताते हुए खारिज कर दिया था।
निज्जर की दो नकाबपोश बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। भारत ने 2020 में निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था। खबरों में कहा गया है कि भारत ने कनाडा से 10 अक्तूबर तक 41 राजनयिकों को वापस बुलाने को कहा है।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि देश में कनाडाई राजनयिक कर्मचारियों की संख्या में कटौती की भारत की मांग पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। भारत ने आपसी राजनयिक उपस्थिति में समानता की मांग के लिए वियना कन्वेंशन का हवाला दिया है। बताया जा रहा है कि कनाडा ने इस तर्क को खारिज किया है।
ट्रूडो और जॉली ने पिछले सप्ताह कहा था कि ओटावा निजी तौर पर गतिरोध को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे कुछ दिन पहले जॉली ने वॉशिंगटन में जयशंकर के साथ एक गुप्त बैठक की थी और इसका श्रेय स्थिति से परिचित लोगों को दिया था।