महाराष्ट्र में पार्किंग स्थान के लिए समान नीति नहीं होने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने अधिकारियों से कहा है कि वे ऐसे लोगों को एक से ज्यादा वाहन रखने की इजाजत न दें, जिनके पास पर्याप्त पार्किंग स्थान न हो। कोर्ट ने कहा, सड़कें वाहनों से अटी पड़ी हैं। सड़कों के दोनों ओर 30 फीसदी जमीन पर वाहनों का कब्जा रहता है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि जिस परिवार का एक फ्लैट हो, अधिकारियों को उसे चार या पांच कार रखने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।
नवी मुंबई के निवासी संदीप ठाकुर ने जनहित याचिका दायर कर सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें डेवलपरों को पार्किंग स्थान कम करने की अनुमति दी गई है।
याचिका में कहा गया है कि डेवलपर नई गगनचुंबी इमारतों में पर्याप्त पार्किंग स्थान नहीं देते, मजबूरन निवासियों को हाउसिंग सोसाइटी के बाहर अपने वाहनों को पार्क करना पड़ता है।
पीठ ने सरकार के नियम पर सवाल उठाया कि यदि वाहनों की पार्किंग पर उचित नीति नहीं बनाई गई, तो अराजक स्थिति उत्पन्न होगी।