पंजाब में कांग्रेस की अच्छी-भली सरकार चल रही थी लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने एक बड़ा जोखिम लिया। इसका नतीजा इस रूप में सामने आया कि जिस राज्य में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव जीतने का प्रबल दावेदार मानी जा रही थी वहीं एक नेता के अड़िअल रवैए तो एक के बागी तेवर ने जीती हुई बाजी पलट दी है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस्तीफा देने से पहले पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपनी नाराजगी भी जता दी और वह खबर मीडिया में लीक भी हो गई। इस्तीफे के बाद अमरिंदर ने मीडिया से कहा मुझ पर सरकार नहीं चलाने का संदेह किया गया। मेरा अपमान हुआ है।
जबकि भारतीय जनता पार्टी ने पिछले कुछ महीनों में कई उत्तराखंड, असम, कर्नाटक और गुजरात में मुख्यमंत्रियों को बदल दिया। गुजरात में पूरी कैबिनेट बदल दी लेकिन किसी तरह का अंसतोष बाहर नहीं आया। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री इस्तीफा देकर बाहर आए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अधयक्ष जे पी नड्डा का आभार जताया। अपनी कुर्सी गंवाने के बाद पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल की आंखों से आंसू भी निकल आए, लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा।
वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह जब इस्तीफा देकर निकले तो खुलेआम सोनिया गांधी से नाराजगी दिखाई और पार्टी नेतृत्व को कोसा। वहीं छत्तीसगढ़, राजस्थान और कांग्रेस में कुर्सी की मार मची हुई है और इन झगड़ों को लेकर पार्टी की किरकिरी होती रही है। इससे साफ है कि भाजपा में हर राज्य के मामले में केंद्रीय आलाकमान की भूमिका महत्वपूर्ण है और राज्य नेतृत्व पर भी उनकी पूरी धमक है।
यही वजह है कि मध्यप्रदेश में अपनी सरकार गंवाने के बाद कांग्रेस अब महज तीन राज्यों में सिमट चुकी है जबकि भाजपा 17 राज्यों में अपने दम पर या सहयोगी दलों (एनडीए) के साथ सरकारों में हैं। आखिर ऐसी कौन सी बात है जिससे भाजपा राज्यों और केंद्र में मजबूत होती जा रही है और कांग्रेस का कुनबा बिखरता जा रहा है।
इन पांच बिंदुओं में जानिए भाजपा और कांग्रेस संगठन के बीच का बुनियादी फर्क
1.
भाजपा नेतृत्व का पार्टी पर पूरा कंट्रोल
भाजपा और कांग्रेस में बुनियादी फर्क में यही है कि भाजपा नेतृत्व का पूरा कंट्रोल अपनी पार्टी में है और नेतृत्व मजबूत है। जबकि कांग्रेस का कोई कंट्रोल न तो पार्टी पर है और न ही कार्यकर्ताओं पर। भाजपा में हाईकमान का फैसला सर्वमान्य होता है और कोई उसके खिलाफ जाने की कोशिश नहीं करता। जबकि कांग्रेस छत्तीसगढ़, राजस्थान और अब पंजाब के संकट से जूझ रही है।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं यह दोनों पार्टी के बीच का सबसे बड़ा फर्क है कि एक पार्टी में नेतृत्व की बात पत्थर की लकीर है जबकि कांग्रेस में नेता उस लकीर को छोटा-बड़ा करने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस का नेतृत्व उलझन में रहता है। वह सोचने में बहुत वक्त लेता है। जबकि भाजपा नेतृत्व की बात इसलिए पार्टी में सर्वमान्य होता है कि भाजपा नेतृत्व में चुनाव को जीतने की कुव्वत है।