कांग्रेस पार्टी ने 2022 में सात राज्य में होने जा रहे विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने अपने चुनावी एजेंडे में डॉ. बीआर अंबेडकर को खासी तव्वजो दी है। चुनावी राज्यों के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का अनुसूचित जाति विभाग 'समता चेतना वर्ष' कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इसमें दो बातें रहेंगी। पहली, लोगों को डॉ. अंबेडकर की चेतावनी याद दिलाई जाएगी। दूसरी, जनता के समक्ष राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट रखकर उन्हें 'अनुसूचित जाति' के लोगों के साथ हुए अपराधिक मामलों की जानकारी देंगे।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एनसीआरबी रिपोर्ट का डाटा, जिसमें अनुसूचित जातियों के खिलाफ जातीय अत्याचारों में 9.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, वह कांग्रेस पार्टी को चुनावी बढ़त दिला पाएगा, इसमें संदेह है। हालांकि कांग्रेस पार्टी अनुसूचित जाति विभाग ने जो चुनावी रणनीति तैयार की है, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी/आरएसएस सरकार को अनुसूचित जातियों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
बता दें कि एनसीआरबी रिपोर्ट 2020 इसी सप्ताह जारी हुई है। उसके मुताबिक, 2018 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ जो अपराधिक घटनाएं हुई हैं, उनकी संख्या 42,793 थी। इसके अगले साल यह संख्या 45,961 हो गई। पिछले साल, यह आंकड़ा 50,291 पर पहुंच गया। हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि बहुत से मामले ऐसे भी रहे हैं, जिनमें पुलिस के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं था, उस कारण वे मामले खत्म कर दिए गए। पिछले साल ऐसे केसों की संख्या 44,338 थी, जबकि 17,113 केस लंबित दिखाए गए हैं। कांग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग का कहना है कि अगले वर्ष सात राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में इन मामलों को उठाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में 2018 के दौरान अनुसूचित जातियों के खिलाफ हुई अपराधिक घटनाओं में 11,924 केस दर्ज किए गए थे। साल 2019 में केसों की यह संख्या घटकर 11,829 हो गई। पिछले साल यह संख्या बढ़ गई। ऐसे 12,714 मामले दर्ज किए गए।
2020 में कुल लंबित मामले, दर्ज केस और जिनमें जांच शुरू हुई है, उनकी संख्या 14,179 है। उत्तर प्रदेश में 24 केस ऐसे थे, जिनमें अनुसूचित जातियों के लोगों को सार्वजनिक स्थान पर जाने से रोका गया था। उत्तराखंड में 2018 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ जो अपराधिक घटनाएं हुईं, ऐसे मामलों की संख्या 58 थी। 2019 में 84 और 2020 में वह संख्या 87 हो गई। लंबित मामले, दर्ज केस और जिनमें जांच शुरू हुई है, ऐसे मामले 120 हैं। तीसरा चुनावी राज्य गुजरात है। यहां 2018 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ हुए अपराधों के चलते 1426 केस दर्ज किए गए थे। 2019 में 1416 और 2020 में 1326 केस दर्ज हुए हैं। पंजाब में 2018 के दौरान अनुसूचित जातियों के खिलाफ हुए अपराधों के चलते 168 केस दर्ज किए गए थे। 2019 में 166 और 2020 में 165 मामले दर्ज हुए थे। इसी तरह गोवा में यह संख्या क्रमश: 5, 3 और 2 रही है। हिमाचल प्रदेश में ये मामले 130, 189 व 251 हैं।