अगले साल भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य अगले साल और 2023 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर भी है इसलिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले महीनों में कई कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले हैं। पीएम मोदी 15 नवंबर को भोपाल में आयोजित होने वाले बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम और छह दिसंबर को डॉ भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। दूसरी तरफ पार्टी एससी और एसटी के स्थानीय नायकों को सम्मान दे रही और उन्हें संगठन में शामिल किया जा रहा है।
सबसे पहले बात जनजातीय महासम्मेलन की
जानकार बताते हैं कि मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव लगभग दो साल बाद होने हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी 2018 की गलतियों को नहीं दोहरा चाहती है। इसलिए वह अभी से उन सभी मोर्चे पर जुट गई है जिसकी नजरअंदाजी की वजह से 2018 में उसे बड़ा सियासी नुकसान उठाना पडा था। इसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य के अनसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों तक पहुंचना।
राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक प्रदेश की एससी-एसटी आबादी भाजपा से थोड़ी खफा-खफा रहती है, क्योंकि संगठन में उनका प्रतिनिधित्व बेहद कम है। इस वजह से इन समुदायों को भाजपा अपनी ओर नहीं खींच पाती। अब पार्टी संगठन विस्तार से लेकर सरकारी कार्यक्रमों के जरिए उन्हें अपने पाले में लेने की कोशिश में है। एसटी समुदाय को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर प्रदेश भर में अभियान चला जा रहा है। कुछ दिनों पहले गृहमंत्री अमित शाह की जबलपुर यात्रा को भी इसी प्रयास से जोड़ कर देखा जा रहा है।
15 नवंबर को आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा
- फोटो : Twitter : @TribalArmy
अगले साल भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य अगले साल और 2023 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर भी है इसलिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले महीनों में कई कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले हैं। पीएम मोदी 15 नवंबर को भोपाल में आयोजित होने वाले बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम और छह दिसंबर को डॉ भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। दूसरी तरफ पार्टी एससी और एसटी के स्थानीय नायकों को सम्मान दे रही और उन्हें संगठन में शामिल किया जा रहा है।
सबसे पहले बात जनजातीय महासम्मेलन की
जानकार बताते हैं कि मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव लगभग दो साल बाद होने हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी 2018 की गलतियों को नहीं दोहरा चाहती है। इसलिए वह अभी से उन सभी मोर्चे पर जुट गई है जिसकी नजरअंदाजी की वजह से 2018 में उसे बड़ा सियासी नुकसान उठाना पडा था। इसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य के अनसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों तक पहुंचना।
राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक प्रदेश की एससी-एसटी आबादी भाजपा से थोड़ी खफा-खफा रहती है, क्योंकि संगठन में उनका प्रतिनिधित्व बेहद कम है। इस वजह से इन समुदायों को भाजपा अपनी ओर नहीं खींच पाती। अब पार्टी संगठन विस्तार से लेकर सरकारी कार्यक्रमों के जरिए उन्हें अपने पाले में लेने की कोशिश में है। एसटी समुदाय को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर प्रदेश भर में अभियान चला जा रहा है। कुछ दिनों पहले गृहमंत्री अमित शाह की जबलपुर यात्रा को भी इसी प्रयास से जोड़ कर देखा जा रहा है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।
- फोटो : अमर उजाला
इसी रणनीति के तहत केंद्र सरकार ने आगामी 15 नवंबर को आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस मौके पर 15 नंवबर से अगले एक हफ्ते तक सरकार पूरे देश में कार्यक्रम करके आदिवासियों के योगदान और उनके गौरवशाली अतीत के बारे में बताने जा रही है। जिसके लिए 15-22 नवंबर तक देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसमें आदिवासी समुदाय के अनजाने नायकों के प्रति आभार जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।
बताया जा रहा है कि आजादी के बाद देश में जनजातीय समुदाय के मद्देनजर इस लिहाज से पहली बार यह पहल हो रही है। इसी कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को मप्र की राजधानी भोपाल में जनजातीय महासम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेश के दो लाख से ज्यादा आदिवासियों के जुटने की संभावना है। भाजपा की इस मुहिम को अगले साल मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पहल का फायदा पार्टी को छत्तीसढ़ चुनाव के साथ-साथ पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में भी मिल सकता है जहां एसटी आबादी एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है।
मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा पहले ही कर चुकी है। इसी कड़ी में भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इस स्टेशन के नए भवन का लोकार्पण करने वाले हैं। राज्य के परिवहन विभाग ने स्टेशन का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे शुक्रवार को मंजूरी दे दी गई। रानी कमलापति भोपाल की अंतिम गोंड आदिवासी शासक थीं। उन्होंने अफगान शासक दोस्त मोहम्मद से बचने के लिए कमलापति महल के बाहर जल समाधि ले ली थी। भोपाल में उस स्थान पर आज रानी की भव्य प्रतिमा है
मध्य प्रदेश में भारत में सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोग हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार वे राज्य की आबादी का लगभग 21.5 प्रतिशत हैं। वहीं प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 15.6 प्रतिशत है। राज्य की 47 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं।
किसान, मजदूर और आदिवासी सम्मेलन (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
दूसरी तरफ राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो या एनसीआरबी के ताजा आंकड़ें बताते हैं कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अत्याचार के सबसे अधिक 2,401 मामले दर्ज किए गए हैं। 2019 में यह आंकड़ा 1,922 था, जबकि 2018 में मामलों की संख्या 1,868 था। दो साल की अवधि में, राज्य में आदिवासी लोगों के खिलाफ अत्याचारों में 28 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी को डर है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनुसूचित जातियों की नाराजगी कहीं बढ़ न जाए। 2018 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एसटी और एससी वर्ग में भाजपा के प्रति नाराजगी देखी गई थी। जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भांप लिया था। पिछली बार की गलती दोहराई न जाए इसलिए इस बार संघ यहां सक्रिय है। लिहाजा, इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करके पार्टी एसटी समुदाय के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं संघ की कोशिश है कि एससी और एसटी समुदाय का भाजपा पर भरोसा बना रहे। पार्टी मान रही है कि राज्य में आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती मनाना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में कई सीटें आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित हैं।
2018 में भाजपा से दूर रही एससी, एसटी
2003 में, जब भाजपा ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया तब भगवा पार्टी ने एससी, एसटी के लिए आरक्षित कुल 67 सीटें जीती थीं। जबकि कांग्रेस के खाते में महज 15 सीटें आई थीं। हालांकि, 2018 के चुनावों में पासा पलटा और 15 साल पुरानी भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंका। 2018 में भाजपा केवल 18 एससी और 16 एसटी सीटें जीती पाई, जबकि 2013 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 31 एसटी सीटों और 28 एससी सीटों पर जीत हासिल की थी।
Doctor bhimrao ambedkar Jayanti 2021
- फोटो : facebook/Communist Party of India (Marxist)
महापरिनिर्वाण दिवस से यूपी, पंजाब, उत्तराखंड चुनाव पर नजर
दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव के लिए एससी वोट को ध्यान में रखकर पार्टी छह दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस मनाएगी। इस दिन संविधान के निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकरकी पुण्यतिथि है और इस दिन को महापरिनिर्वाण दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में पीएम मोदी पूरे देश में सैकड़ों केंद्रों से जुडेंगे। जिसमें पंचतीर्थ भी शामिल है। पंचतीर्थ डॉ आंबेडकर के जीवन और कार्य से जुड़े पांच महत्वपूर्ण स्थान हैं जैसे उनकी जन्मभूमि महू, दीक्षा भूमि नागपुर, चैत्य भूमि मुंबई, दिल्ली के अलीपुर रोड पर आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक और दिल्ली के जनपथ में डॉ अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, जहां आंबेडकरर की स्मृति में समारोह आयोजित किए जाएंगे।
यूपी में करीब 21 फीसदी एससी आबादी है और राजनीतिक दलों के लिए एक प्रमुख वोट बैंक हैं। भाजपा अनुसूचित जाति की आबादी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और मोदी सरकार उनके लिए कई कल्याणकारी उपायों की घोषणा कर रही है। जानकारी के मुताबिक भाजपा राज्य में “जय भीम” के समावेशी नारे के साथ प्रचार करने की योजना बना रही है।
पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी
- फोटो : ANI
इसी तरह पंजाब में करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी है। जहां 117 में से 34 सीटें एससी के लिए आरक्षित हैं। यहां भाजपा, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने एससी मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया है लेकिन कांग्रेस ने पहले ही एससी समुदाय के चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर मास्टर स्ट्रोक चल दिया है। लिहाजा भाजपा के लिए एससी वोट बैंक को अपने पाले में लाना राज्य में बड़ी चुनौती है।
उत्तराखंड की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति की आबादी 18.50 फीसदी के करीब है। बसपा उत्तराखंड में एससी और मुस्लिम समीकरण पर दांव खेल रही है। कांग्रेस ने भी किसी एससी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कहकर सियासी समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भाजपा ने 2017 के चुनाव में राज्य की 70 सदस्यीय विधानसभा में 57 सीटें जीतकर कांग्रेस को करारी शिकस्त दी थी। इस चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले 13 फीसदी वोट-शेयर ज्यादा हासिल किया था। जो 2019 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 30 फीसदी हो गया था। लिहाजा पार्टी यहां भी अपना वोट शेयर बढ़ाना या स्थिर रखना चाहती है।