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Seat Ka Samikaran: यहां से जीते दो चेहरे रहे विधानसभा अध्यक्ष, ऐसा है सीवान सीट का चुनावी इतिहास

Mon, 21 Jul 2025 09:17 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज सीवान विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट से वर्तमान में बिहार के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी विधायक हैं।  

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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीवान, वो शहर जो कभी बाहुबली शहाबुद्दीन के चलते अक्सर सुर्खियों में रहता था। उस शहर की एक पहचान ये भी है कि यहां की सीवान विधानसभा सीट से जीते दो चेहरे राज्य विधानसभा के अध्यक्ष रहे। अमर उजाला की चुनावी सीरीज  ‘सीट का समीकरण’ में आज बात इसी सीवान विधानसभा सीट की करेंगे। यह सीट पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी का गढ़ है। 
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पहले जाने सीवान सीट के बारे में 
बिहार के 38 जिलें में से एक जिल सीवान है। सीवान जिला 2 अनुमंडल और 19 ब्लॉक में बंटा है। इस जिले में कुल 8 विधानसभा सीट है। इनमें सीवान, जीरादेई, दरौली (एससी) रघुनाथपुर, दरौंधा, बड़हरिया, गोरियाकोठी, महाराजगंज शामिल हैं। ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज बात सीवान विधानसभा सीट करेंगे। यह सीट 1951-52 में अस्तित्व में आई थी।

1952: पहले दो चुनाव और एक उप-चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत 

1952 के चुनाव में सीवान सीट से दो विधायक चुने गए। दोनों ही विधायक कांग्रेस पार्टी से थे। जीतने वालों में शंकर नाथ और राम बसवान राम शामिल थे। शंकर नाथ को कुल 17,419 वोट मिले थे। वहीं, राम बसवान को 10,686 वोट मिले थे। 
1957 चुनाव में कांग्रेस के गदाधर प्रसाद श्रीवास्तव को जीत मिली। उन्होंने जनसंघ के  जनार्दन तिवारी को 5,469 वोट से हराया। गदाधर को 10,932 वोट मिले थे। वहीं, जनार्दन तिवारी को 5,463 वोट मिले। हालांकि, गदाधर प्रसाद ने विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1959 में सीवान सीट पर उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस की एस देवी ने जीत हासिल की। उन्होंने जनसंघ के जनार्दन तिवारी को मात्र 333 वोट से हराया। देवी को 10,639 वोट मिले थे। वहीं जनार्दन तिवारी को 10,306 वोट मिले थे। 

1962: भारतीय जनसंघ को मिली पहली जीत 
उपचुनाव में बेहद करीब से मात खाने के बाद 1962 के विधानसभा चुनाव में जनार्दन तिवारी ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के शंकर नाथ विद्यार्थी को 9,683 वोट से हराया। जनार्दन को 24,206 और शंकर को 14,523 वोट मिले थे।


 

1967: कांग्रेस ने की वापसी 
1967 के चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की। इस चुनाव में राजा राम चौधरी ने जीत दर्ज की। उन्होंने जनसंघ के जनार्दन को मात्र 562 वोट से हराया था। चौधरी को 17,312 वोट मिले थे। वहीं जनार्दन को 16,750 वोट मिले थे। 


 

1969: जनार्दन ने पिछले चुनाव का बदला लिया 
1969 में जनार्दन ने पिछले चुनाव का बदला लेते हुए सीवान विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके साथ 1972 के चुनाव में भी जनार्दन ने जीत हासिल की। उन्होंने 1969 में तत्कालीन विधायक राजा राम को 7,335 वोट से हराया। वहीं, 1972 के चुनाव में जनार्दन ने 4,147 वोट से जीते। जनार्दन को 24,694 वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस के राजाराम को 20,547 वोट से संतोष करना पड़ा। 

1977: जनता पार्टी को मिली पहली जीत 
1977 के विधानसभा चुनाव में सीवान सीट से जनता पार्टी के गुलाम सरवर को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के सेराजुल हक को 8,112 वोट से हराया। गुलाम को कुल 21,981 वोट मिले थे। वहीं, सेराजुल को 13,869 वोट मिले। इस चुनाव में जनार्दन तिवारी तीसरे पायदान पर रहे। 
सीवान सीट से जीते सरवर बाद में बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री बने। वह 1990,1995 और 2000 में केवटी विधानसभा सीट से भी विधायक रहे। इसके साथ ही 1990 में वह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और 1995 में कृषि मंत्री भी रहे। 

1980: भाजपा से विधायक बने जनार्दन  
1980 के विधानसभा चुनाव में जनार्दन तिवारी भाजपा के टिकट पर जीते। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के अवध बिहारी चौधरी को 15,139 वोट से शिकस्त दी। जनार्दन को कुल 28,867 वोट मिले थे। वहींं, अवध बिहारी को 13,728 वोट मिले।

1985: अवध बिहारी का गढ़ बनी सीवान सीट

  • 1985 के चुनाव में जनता पार्टी के अवध बिहारी ने जीत हासिल की। इसके बाद 2005 तक लगातार पांच बार जीते। 1985 में उन्होंने तात्कालिन विधायक जनार्दन तिवारी को 23,032 वोट से हराया। अवध बिहारी को 46,021 वोट मिले थे। वहीं, जनार्दन को मात्र 22,989 वोट मिले थे।
  • 1990 में अवध बिहारी ने जनता दल के टिकट पर जीते। इस चुनाव में उन्हें कुल 47,518  वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस के सेराजुल हक को 29,663 वोट मिले थे।
  • 1995 में अवध बिहारी ने 9,962 वोट से जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई। इस चुनाव में भाजपा के व्यासदेव प्रसाद दूसरे नंबर पर रहे। अवध बिहारी को कुल 46,495 वोट और व्यासदेव को 36,533 वोट मिले थे।  
  • 2000 में अवध बिहारी राजद से चुनावी मैदान में उतरे और बड़ी जीत हासिल की। इस चुनाव में अवध बिहारी ने भाजपा के वासी अहमद को 89,237 वोट से हराया था। अवध को कुल 1,07,933 वोट मिले थे। वहीं, वासी को 18,696 वोट मिले।
  • 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। पहले चुनाव में अवध बिहारी को जीत मिली। अवध बिहारी ने भाजपा के व्यासदेव को 12,912 वोट से मात दी थी। अवध को कुल 39,666 और व्यासदेव को 26,754 वोट मिले थे। 

अक्तूबर 2005: अवध बिहारी के जीत का सिलसिला थमा

अक्तूबर 2005 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 20 साल बाद सीवान सीट पर वापसी की। इसके बाद यह सिलसिला 2020 तक जारी रहा। अक्तूबर 2005 में व्यासदेव ने अवध बिहारी को 3,169 वोट से हराया। व्यासदेव को 42,756 वोट मिले थे। वहीं अवध बिहारी को 39,587 वोट मिले थे। 
2010 चुनाव के व्यास देव ने अवध बिहारी को 12,541 वोट से हराया।  2015 के चुनाव में एक बार फिर भाजपा ने जीत हासिल की। व्यासदेव को 55,156 वोट मिले। दूसरे नंबर जदयू के बबलू प्रसाद रहे। उन्हें 51,622 थे। इस चुनाव में अवध बिहारी तीसरे नंबर थे। उन्होंने 2015 का चुनाव निर्दलीय लड़ा था। 

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2020: 15 साल बाद अवध बिहारी की वापसी  

2020 के चुनाव में अवध बिहारी ने सीवान सीट से छठवीं जीत दर्ज की। इस जीत के लिए उन्हें 15 साल इंताजर करना पड़ा था। इस चुनाव में अवध बिहारी ने भाजपा के ओम प्रकाश को 1,973 वोट से हराया। अवध बिहारी को कुल 76,785 वोट मिले। वहीं, ओम प्रकाश को 74,812 वोट मिले थे। 

2022 में नीतीश कुमार ने पाला बदला और राज्य में महागठबंधन की सरकार आई। इसके बाद राज्य विधानसभा का अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को बनाया गया। चौधरी 26 अगस्त 2022 से 12 फरवरी 2024 तक इस पद पर बने रहे। नीतीश के फिर पाला बदलने के बाद उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। हालांकि, इसके पहले बिहार विधानसभा में काफी हंगामा हुआ। 2024 के लोकसभा चुनाव में अवध बिहार ने सीवान लोकसभा सीट से मैदान में उतरे। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 

 

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