दिल्ली में किसान संगठनों द्वारा आयोजित ट्रैक्टर रैली में जो उपद्रव देखने को मिला, उसकी रूपरेखा तो कई दिन पहले ही तैयार हो गई थी। अलगाववादी खालिस्तानी समूह, सिख फॉर जस्टिस, जो विदेश में बैठ कर कट्टरपंथी गतिविधियों का संचालन करता है, इसके चीफ आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने लालकिला पर झंडा फहराने वाले को 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर देने का एलान किया था। अब सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली पुलिस और दूसरी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पन्नू के एलान को हल्के में लिया था।
सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह सवाल उठा था। जब पन्नू का यह संदेश पुलिस के पास था, तो उसके मुताबिक ट्रैक्टर रैली से निपटने के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए। इस चूक को लेकर सुरक्षा एजेंसियों से जवाब मांगा गया है।
बता दें कि गुरपतवंत सिंह पन्नू, जिसके संगठन की ओर से दो सप्ताह पहले ही अनेक लोगों के पास ऐसी कॉल आना शुरू हो गई थी कि वह 26 जनवरी को कोई बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। बाकायदा उनका यह मैसेज सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचा था। 26 जनवरी आ रही है और लाल किले पर, एक भारतीय तिरंगा है। 26 जनवरी को तिरंगा हटाओ और इसे खालिस्तान के झंडे से बदल दो। मैसेज में ही उन्होंने यह भी कहा था जो लोग भारतीय तिरंगा हटा देंगे, उन्हें 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर मिलेंगे।
इतना ही नहीं, पन्नू ने एक वीडियो भी जारी किया था। इसके जरिए वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के साथ किसानों के मौजूदा आंदोलन को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। पन्नू के समर्थकों ने कथित तौर पर किसान आंदोलन को 'सिखों का संघर्ष' बनाने का भरसक प्रयास किया। ढाई लाख अमेरिकी डॉलर के अलावा, सिख फॉर जस्टिस ने युवा किसान प्रदर्शनकारियों को लुभाने के लिए विदेशी नागरिकता देने का दांव भी चला था।
आतंकी पन्नू का कहना था कि दुनिया के कानून आपके साथ हैं। अगर भारत सरकार आप पर उंगली उठाती है, तो आपको और आपके परिवारों को संयुक्त राष्ट्र कानूनों के तहत विदेश लाया जाएगा। ट्रैक्टर रैली के तीन चार दिन पहले ऐसे मैसेज जारी होने की संख्या बढ़ती चली गई। खालिस्तानी आतंकवादी किसान प्रदर्शनकारियों को प्रोत्साहित कर रहे थे कि खालिस्तान ट्रैक्टर रैली के दौरान उन रास्तों पर जरूर जाएं, जहां उन्हें जाने से मना किया गया है। इसके बाद पन्नू ने साफतौर पर कह दिया कि जो कोई भी लाल किला जाकर झंडा लगाएगा, उसे ढाई लाख अमेरिकी डॉलर दिए जाएंगे।
किसान आंदोलन स्थल पर शुरुआत में जब जगतार सिंह हवारा और जरनैल सिंह भिंडरावाले जैसे आतंकवादियों की तस्वीरें दिखीं तो पहली बार लोगों को यह मालूम हुआ था कि आंदोलन में खालिस्तानी तत्वों की मौजूदगी हो सकती है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले पर नजर रखनी शुरू की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पन्नू के इस संगठन का नाम आतंकियों की सूची में डाल रखा है। इस संगठन पर आरोप हैं कि इसके द्वारा भारत में खालिस्तान की मांग को आगे बढ़ाने वाले संगठनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।