बॉलीवुड गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो ने 18 सितंबर को भाजपा का साथ छोड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर बंगाल की राजनीति में नई भंवर पैदा कर दी थी। सुप्रियो के इस कदम के बाद भाजपा ने अपने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव करते हुए प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दिलीप घोष से लेकर सुकांत मजूमदार को सौंप दी थी। कहा जा रहा है कि भगवा दल ने यह कदम पार्टी में बने आंतरिक मतभेदों को समाप्त करने के लिए उठाया है।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार आसनसोल से सांसद बाबुल सुप्रियो ने मंगलवार को कहा, 'अब जब मैं तृणमूल कांग्रेस के साथ हूं, मैं समझता हूं कि यह भाजपा का अंदरूनी मसला है। एक राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर या एक आम आदमी के तौर पर मैं यह कह सकता हूं कि दिलीप घोष ने बंगाल के लिए अच्छा काम किया है। लेकिन, उनकी भाषा और उनकी टिप्पणियों को बंगाल की जनता ने ठीक तरह से नहीं लिया है।'
सुप्रियो ने कहा, 'मैंने इतिहास नहीं बनाया है... मैं पहला व्यक्ति नहीं हूं जो एक पार्टी छोड़कर दूसरी में शामिल हुआ हो।' बंगाल भाजपा के नए अध्यक्ष की इस टिप्पणी पर कि राज्य तालिबानीकरण का सामना कर रहा है, सुप्रियो ने कहा कि इस शब्द को इतने हल्के मायनों में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मैंने तब भी इसका विरोध किया था जब विपक्ष और गीतकार जावेद अख्तर जैसे आलोचकों ने ऐसी ही बातें भाजपा के लिए कही थीं।
इसके साथ ही सुप्रियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद भी कहा। उन्होंने कहा कि मैंने इन लोगों के साथ सात साल तक काम किया और इस दौरान मैंने भाजपा से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने कहा कि साल 2014 के चुनाव में मेरी जीत हो सकता है कि बॉलीवुड गायक होने के चलते मिली हो, लेकिन 2019 की जीत मेरे जनसेवा के कार्यों के चलते सुनिश्चित हुई थी।
उन्होंने आगे कहा, 'मैं उस टीम की ओर से खेलूंगा जो मुझे खेल के मैदान में रखेगी।' उल्लेखनीय है कि जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए विस्तृत फेरबदल के दौरान बाबुल सुप्रियो से केंद्रीय मंत्री पद वापस ले लिया गया था। इसके बाद से ही सुप्रियो, भाजपा नेतृत्व से खफा दिखाई दे रहे थे। हालांकि, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन केवल सत्ता में बने रहने के लिए थामा है।
इसके साथ ही सुप्रियो ने अपनी तुलना प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी से साथ भी की। उन्होंने कहा, 'क्या वह (मेसी) बर्सिलोना छोड़ना चाहते थे? परिस्थितियां ऐसी थीं कि वह प्रेस वार्ता के दौरान रो पड़े थे। इसके बाद वह पीएसजी के साथ हो गए। और अब आप कह रहे हैं कि पीएसजी के लिए खेलते हुए क्या वह बर्सिलोना के खिलाफ रहेंगे या गोलपोस्ट के पास खड़े रहेंगे क्योंकि उन्हें अपनी पुरानी टीम के प्रति वफादार रहना चाहिए?'