आइकास के नेशनल प्रेसिडेंट और पूर्व आईएस अधिकारी ए बी शुक्ला ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन की वर्तमान परिस्थितियों के निर्माण में उसके पूर्व कर्मों का प्रभाव बहुत हद तक महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष की सहायता से इन पूर्व कर्मों के प्रभावों का पता लगाकर व्यक्ति को सही कर्मों के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ज्योतिष शास्त्रों में बारहवें घर में गए केतु की बहुत महिमा गाई गई है और इसे मोक्षकारक बताया गया है। उन्होंने कहा कि देखा जाए तो केतु ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जो माया के आवरण को काट कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कुंडली के द्वादश भाव में केतु के होने से कई और प्रभावों पर चर्चा की।
बताया ज्योतिष व वास्तु का संबंध
कानपुर से आए वरिष्ठ ज्योतिषी एवं आईकास के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट प्रेस भोलानाथ शुक्ला ने सम्मेलन में ज्योतिष और वास्तु के आपसी संबंधों की चर्चा की। उन्होंने सभी ज्योतिषयों से आग्रह किया कि वे किसी स्थान का वास्तु कर्म करने से पहले उस स्थान का प्रबंधन या संचालन करने वाले मुख्य व्यक्ति की कुंडली और उसके चतुर्थ भाव पर अवश्य विचार करें। उन्होंने आइकास के संस्थापक एवं प्रख्यात ज्योतिषी डॉ. बी वी रमन के एक पत्र का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा कि इस संस्था का मकसद वर्तमान ज्योतिष से अस्वस्थ परंपराओं का निकालना है।
कुंडली के दुस्थानों की चर्चा करते हुए कानपुर से वरिष्ठ ज्योतिषी एवं आईकास के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट रमेश चिंतक ने कहा कि छठे भाव को रोग, रिण और रिपु का भाव कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के कर्म एवं वाणी ठीक रहेगी उनका छठा भाव भी ठीक रहेगा। चिंतक ने छठे भाव में विभिन्न ग्रहों के बैठे होने के प्रभावों की विस्तार से चर्चा की।
कुंडली में माला योग से उन्नति संभव
उन्होंने कहा कि दो दिन बाद गोचर में शुभ माला योग बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुंडली में माला योग बनने से व्यक्ति काफी उन्नति करता है। उन्होंने आगाह किया कि कुंडली देखते समय यह अवश्य पता करना चाहिए कि यह शुभ माला योग है या अशुभ।
जयपुर के प्रसिद्ध वास्तुविद् एवं ज्योतिषी पंडित सतीश शर्मा ने कहा कि कुंडली के 6-8-12 भाव बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनमें आयु और आरोग्य आता है। भूख भी आरोग्य के तहत ही आती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य के शरीर में वात-पित्त-कफ को शुद्ध किए बिना जीवन स्वथ्य नहीं बनाया जा सकता उसी प्रकार कुंडली इन तीनों भावों की शुद्धि के बिना जीवन में उन्नति नहीं की जा सकती। शर्मा ने कहा कि इन तीनों ही भाव से विपरीत राजयोग बनते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल अधिकतर राजनीतिक नेताओं की कुंडली में विपरीत राजयोग, नीच का चंद्रमा और दुस्थानों में राहु देखने को मिलता है।
इन्होंने भी किया संबोधित
आईकास के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट प्रदीप चतुर्वेदी, ग्वालियर से आए परमेंद्र चतुर्वेदी, नोएडा से शैफाली मित्तल और रोहिणी से नितिन कश्यप ने दुस्थानों से जुड़े अपने अनुभवों और निष्कर्षों को साझा किया। सम्मेलन में देश भर से आये शीर्ष ज्योतिषी मुख्य विषय के आलोक में ज्योतिष सूत्रों पर मंथन करेंगे और अपने अनुभव ज्योतिष अनुरागियों के बीच साझा करेंगे।
ज्योतिष के वैज्ञानिक प्रचार में जुटी है संस्था
ऑल इंडिया एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेज (आइकास) ज्योतिष का वैज्ञानिक ढंग से प्रचार प्रसार करने को प्रतिबद्ध एक पंजीकृत संस्था है। देश भर में इसके करीब 60 चैप्टर के माध्यम से ज्योतिष का अध्ययन वैज्ञानिक रीति से करवाया जाता है। आइकास इस तरह के वार्षिक सम्मेलन देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित करवाता रहा है। इस बार का वार्षिक सम्मेलन आइकास का नोएडा चैप्टर आयोजित करवा रहा है।