पहले राज्य के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी तीन राजधानियां बनाना चाहते थे। जिसमें अमरावती को विधायी राजधानी, विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाने की योजना थी। इसके साथ ही ऐसा करने वाला ये देश का पहला राज्य बन गया था।
आंध्र प्रदेश की जगनमोहन सरकार ने विवादास्पद ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों के समावेशी विकास कानून, 2020’ को सोमवार को वापस ले लिया। मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने विधानसभा को बताया कि लोगों के व्यापक हितों की रक्षा के लिए 2020 के कानून को रद्द किया गया है। उन्होंने कहा उनकी सरकार एक ‘व्यापक, पूर्ण और बेहतर’ विकेंद्रीकरण विधेयक लाएगी।
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साल 2020 में यह कानून राज्य के लिए तीन राजधानियां स्थापित करने के मकसद से बना था। पिछली टीडीपी शासन में अमरावती को राजधानी के तौर पर विकसित करने की योजना थी। अमरावती में नई राजधानी बनाना टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा था। जब नायडू सीएम थे तब वे कहते थे कि अमरावती को वह ऐसी मॉडल राजधानी बनाएंगे कि देश के दूसरे राज्य भी प्रेरणा लेंगे। 2024 तक राजधानी के पूर्ण रूप से विकसित होने की संभावना थी।
आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम, 2020 क्या था?
2019 में जब वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई और जगनमोहन रेड्डी राज्य के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अमरावती में एक महत्वाकांक्षी विश्व स्तरीय राजधानी शहर बनाने के पिछली सरकार के फैसले को उलटने का फैसला किया था। मौजूदा राजधानी अमरावती विजयवाड़ा और गुंटूर के बीच स्थित है। इसके लिए तेलगु देशम पार्टी की सरकार ने भूमि-पूलिंग योजना के माध्यम से 29 गांवों से 33,000 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया था। उन्होंने इसके बदले ग्रामीणकों को आर्थिक मुआवजा देने के अलावा विकसित भूखंड भी देने का वादा किया था।
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चंद्रबाबू नायडू
दो जून, 2014 को तेलंगाना राज्य बनने के समय आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून में यह प्रावधान किया गया था कि हैदराबाद अगले दस साल तक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों ही राज्यों की संयुक्त राजधानी रहेगी। तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने नई राजधानी के लिए अमरावती को चुना। उनके अनुरोध पर 22 अक्टूबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरावती में नई राजधानी के निर्माण की बुनियाद रखी। नई राजधानी के निर्माण के लिए सिंगापुर की कुछ कंपनियों के साथ कई समझौता ज्ञापनों पर दस्तखत भी किए गए।
चंद्रबाबू नायडू की पिछली सरकार में आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद से अमरावती शिफ्ट हुई थी। सरकार ने हैदराबाद से अपनी राजधानी को समेटते हुए अमरावती में अंतरिम सरकारी परिसर, एक अस्थायी उच्च न्यायालय भवन, एक स्थायी विधायी परिसर, सांसदों, न्यायाधीशों और अधिकारियों के लिए बंगले और अपार्टमेंट बनाए।
जगन ने किया था विरोध
तब जगन मोहन रेड्डी विपक्ष के नेता थे। उन्होंने तब अमरावती को राजधानी बनाने का विरोध किया था। उन्होंने अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने में चंद्रबाबू नायडू पर बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा था कि नायडू की कंपनियों ने अमरावती में किसानों से औने-पौने दाम पर जमीन खरीदने का खेल किया है।
जब वाई एस जगन मोहन रेड्डी की नेतृत्व वाली सरकार बनी तो उन्होंने इस परियोजना को छोड़ दिया और विकेंद्रीकरण के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। सरकार ने पहले ही दिन से अमरावती के विकास की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई। 2020 में, उन्होंने आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2020 को रद्द कर दिया और आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों के समावेशी विकास अधिनियम, 2020 को पारित कर दिया। इस तरह, अमरावती को विधायी राजधानी, विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाने का रास्ता खुला।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी
- फोटो : ट्विटर
फिर सरकार क्यों पलटी?
तीन राजधानी संबंधी कानून से किसान और जमीन मालिक नाराज थे और लगातार विरोध कर रहे थे। बीते एक नवंबर को किसानों ने अमरावती से तिरुपति तक 45 दिन की पैदल मार्च निकाला था। जगन मोहन रेड्डी सरकार के फैसले के खिलाफ आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में सौ से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई याचिकाओं को विपक्षी पार्टी टीडीपी का समर्थन हासिल था। अमरावती के वे किसान, जिन्होंने अपनी जमीनें नई राजधानी बनाने के लिए दी थीं वे चाहते थे कि सरकार पिछली योजना पर ही टिकी रहे और केवल अमरावती में ही विश्व स्तरीय राजधानी शहर का निर्माण हो। कोर्ट ने हाल ही में कुछ याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी।
सोमवार सुबह में ही महाधिवक्ता सुब्रह्मण्यम श्रीराम ने एक हलफनामे में सरकार के फैसले की जानकारी उच्च न्यायालय को दी। उन्होंने कोर्ट से कहा कि सरकार इस कानून को रद्द करेगी। मुख्यमंत्री का आरोप है कि राज्य के विकेंद्रीकृत विकास के उनके इरादे पर भ्रम और गलत सूचनाएं फैलाई गई। कानूनी अड़चनें भी पैदा की गईं और मुकदमे दर्ज कराए गए।
क्या अब आंध्र प्रदेश की एक ही राजधानी होगी?
यह साफ नहीं है कि सरकार अमरावती को ही एकमात्र राजधानी के रूप में रखेगी या नहीं। मुख्यमंत्री ने अपने पूरे संबोधन में सभी क्षेत्रों के समान विकास के लिए विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। सीएम ने नए विधेयक को पेश करने के लिए कोई समय सीमा भी निर्धारित नहीं की।