आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी
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आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी की अगुवाई वाली सरकार ने विवादित ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों के समावेशी विकास कानून, 2020’ को निरस्त करने के लिए सोमवार को विधानसभा में एक विधेयक पारित किया। साल 2020 में यह कानून राज्य के लिए तीन राजधानियां स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया था।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया कि लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस कानून को निरस्त किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकेंद्रीकृत विकास के लिए एक व्यापक, पूर्ण और बेहतर विकेंद्रीकरण विधेयक लेकर आएगी। उन्होने कहा कि हमारी योजना विकेंद्रीकृत विकास की थी लेकिन इसे लेकर गलतफहमियां फैलाई गईं।
हमारा विचार गलत तरीके से पेश किया गया: सीएम
जगनमोहन रेड्डी ने कहा, 'जब से हम प्रदेश में विकेंद्रीकृत विकास (तीन राजधानियों की व्यवस्था) के विचार के साथ आए तो इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, गलतफहमियां पैदा की गईं, कानूनी अड़चनें लगाई गईं। पिछले दो साल में यह तर्क देकर दुष्प्रचार भी किया गया कि तीन राजधानियों की व्यवस्था लाने से कुछ वर्गों के साथ अन्याय होगा।'
किसान और जमीन मालिक थे इस कानून से नाराज
बता दें कि तीन राजधानियों की व्यवस्था से संबंधित इस कानून से किसान और जमीन मालिक खासे नाराज थे और लगातार इसके प्रति विरोध जता रहे थे। इसे लेकर किसानों ने अमरावती से तिरुपति तक पैदल मार्च भी निकाला था। इन सब घटनाओं और परिस्थितियों के बीच अब राज्य ने इस विवादास्पद कानून को रद्द करने का फैसला लिया है।
आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास (निरसन) अधिनियम को पिछली तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) सरकार ने 2015 में अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में विकसित करने के अधिकार को समाप्त करने के लिए पारित किया था। विशाखापत्तनम, कुरनूल और अमरावती में कार्यकारी, न्यायिक और विधायी राजधानियों की स्थापना के लिए एपी विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम पारित किया गया था।