आज का दिन आपका अभिनंदन करने का दिन है। अमर उजाला का पहला अंक 18 अप्रैल 1948 को पाठकों तक पहुंचा था। आगरा से यह एक विनम्र किन्तु ढृढ़ संकल्पों से भरी शुरुआत थी। संस्थापक द्वय श्री डोरीलाल अग्रवाल और श्री मुरारीलाल माहेश्वरी ने पत्रकारिता के उच्चतर मूल्यों के साथ इस उपक्रम को आरंभ किया था। अमर उजाला के प्रथम संपादकीय में ही स्पष्ट किया गया था- 'अमर उजाला को राष्ट्रीय उद्देश्यों के लिए निर्भीकता के साथ चलाया जाएगा। उस पर किसी दलगत राजनीति को हावी नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए कभी किसी स्रोत्र से किसी भी प्रकार का संरक्षण, दान, अनुग्रह-धन स्वीकार नहीं किया जाएगा।'
संकल्प के इस उजाले में प्रशस्त हुए मार्ग पर चलते हुए ही आज हम 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।यह आपके-हमारे विश्वास के महोत्सव का क्षण है।
इस विश्वास ने अमर उजाला को छ: राज्यों, दो केंद्रशासित प्रदेशों के विशाल समूह में परिवर्तित कर दिया है, जिसकी चेतना का विस्तार समूचे हिंदी पत्रकारिता जगत में महसूस किया जाता है। इक्कीस संस्करणों की यह यात्रा अविराम है और इस दौरान स्नेहियों ने न सिर्फ दैनिक पत्रकारिता बल्कि समाज के मूलभूत सरोकारों में सीधी भागीदारी के जरिये भी अमर उजाला को अपने विश्वास पर खरा पाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, भाषा, साहित्य और समाज के पर्ति अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए अमर उजाला स्कॉलरशिप, अपराजिता, साइबर पाठशाला, रक्तदान, हिंदी हैं हम, शब्द सम्मान, बादल घाटी ग्राम विकास परियोजना जैसे कई-कई उपक्रम हैं, जो सबके जेहने में अंकित हो गए हैं। परंपरा की श्रेष्ठता के साथ समकालीन तकनीकी तथा आधुनिक विचारों के समन्वय से समृद्ध अमर उजाला डिजिटल रूप में भी नई सफलताएं दर्ज करा रहा है।
यह वर्ष नए अनुभवों के साथ नई चुनौतियों का भी है। देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। देश के उज्ज्वलतम भविष्य में अमर उजाला अपना शक्तिभर योग दे सके, यही संकल्प हम दोहराते हैं।
समाचार संकलन, लेखन, संपादन, विज्ञापन, वितरण सभी पक्षों से जुड़े विशाल अमर उजाला परिवार के सामूहिक श्रम की सार्थकता इसमें निहित है कि अपने करोड़ों स्नेही पाठकों का विश्वास अक्षुण्ण रहे।
हमें गर्व है कि यह विश्वास अपरिमित हुआ है। इस स्नेह के प्रति अमर उजाला नतमस्तक है।
सबका अभिनंदन। सबको बधाई। सबका आभार।