विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अफगानिस्तान से सभी भारतीयों को निकालने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां स्थिति गंभीर बनी हुई है।
बैठक के बाद मीडिया से बाद करते हुए विदेश मंत्री ने इस सवाल पर कि तालिबान को लेकर सरकार का रुख क्या है, कहा कि अफगानिस्तान में हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, 'आपको धैर्य रखना होगा, स्थिति सामान्य होने दीजिए।' यहां केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल और संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी भी थे। जयशंकर ने कहा, इसे लेकर सभी दलों की समान राय है, हमने इस पर राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ चर्चा की।
बैठक में सरकार ने अफगानिस्तान से निकाले गए लोगों का डाटा भी साझा किया। इसके अनुसार 175 दूतावास कर्मचारियों को, 263 अन्य भारतीय नागरिकों को, 112 अफगान नागरिकों (हिंदू व सिख समेत), 15 अन्य देशों के नागरिकों समेत कुल 565 लोगों को निकाला गया है। डाटा में यह भी कहा गया है कि सरकार ने अन्य एजेंसियों द्वारा भी भारतीयों को वहां से निकालने में मदद की। जयशंकर ने कहा कि वहां से जितनी जल्दी हो सके लोगों को निकालना जरूरी है।
कौन-कौन हुआ इस बैठक में शामिल
बैठक में देश के 31 राजनीतिक दलों के के 37 नेताओं ने हिस्सा लिया। एनसीपी प्रमुख शरद पवार और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी बैठक में शामिल हुए। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौघरी, द्रमुक के टीआर बालू, अपना दल की अनुप्रिया पटेल, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, जदयू के लल्लन सिंह और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता भी बैठक में मौजूद रहे।