किसान न्यूनतम की बात क्यों करते हैं, अधिकतम की बात क्यों नहीं करते? फलों, सब्जियों व अन्य चीजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित नहीं होने के बाद भी किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। ज्यादातर किसान इस ओर मुड़ रहे हैं।
कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य एवं कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद जोशी मानते हैं कि इससे कृषि सुधारों पर असर पड़ेगा। क्योंकि कृषि में निवेश की काफी जरूरत है। कृषि कानूनों के विरोध के बाद किसानों से बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट की गठित कमेटी ने रिपोर्ट सौंप दी थी। जिस पर कोर्ट को फैसला लेना है। पेश है कृषि विशेषज्ञ से मनीष मिश्र की बातचीत।
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कृषि सुधारों पर कितना असर पड़ेगा?
देश में कृषि ढांचे, भूमि विकास, वेयर हाउस, कोल्ड चेन में बहुत निवेश की जरूरत है। कानूनों की वापसी के बाद इस पर असर पड़ेगा। पीएम ने कमेटी बनाकर खेती में सुधार की बात कही है, देखना होगा कि इसका कितना असर होता है? हमारा काम था रिपोर्ट देना अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा क्या करना है। वैसे जब कानून ही वापस हो गए तो रिपोर्ट का मतलब ही नहीं बचता है।
फैसला इतनी देरी से क्यों हुआ?
सरकार ने पहले सोचा था कि किसान मान जाएंगे, लेकिन अगर लेने वाला ही खुश नहीं तो सरकार क्या करे? आंदोलन लगता है कानून के लिए न होकर, राजनीति के लिए था।
एमएसपी गारंटी की मांग जोर पकड़ रही है इस पर आपका क्या कहना है?
किसान न्यूनतम की बात क्यों करते हैं, अधिकतम की बात क्यों नहीं करते? फलों, सब्जियों व अन्य चीजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित नहीं होने के बाद भी किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। ज्यादातर किसान इस ओर मुड़ रहे हैं। दुनिया में एग्री फूड सिस्टम बहुत तेजी से बदल रहा है। किसानों को सिर्फ 130 करोड़ लोगों की बात न करके, दुनिया के मार्केट के हिसाब से सोचना चाहिए। दुनिया में जैसी मांग है वैसे ही उत्पाद बनाने होंगे।