केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद दार्जिलिंग को केंद्र शासित राज्य बनाने की आस फिर जगी है। पहाड़ी पार्टियों ने केंद्र से अपनी मांग को दोहराया है। दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिस्ता ने कहा कि हमें उम्मीद है कि 2024 चुनाव तक दार्जिलिंग के राजनीतिक संकट का मसला हल हो जाएगा।
हालांकि सत्ता में मौजूद तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल से दार्जिलिंग को अलग करने के किसी भी फैसले का पुरजोर विरोध करेगी। बिमल गुरुंग के नेतृत्व वाली गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने कहा भाजपा को अपना चुनावी वादा याद करना होगा और दार्जिलिंग की जनता को न्याय दिलाना होगा। जीजेएम भाजपा का समर्थन करती है।
जीजेएम महासचिव रोशन गिरी ने कहा, दार्जिलिंग ने पिछले कुछ दशक में बहुत झेला है और लगातार अलग राज्य बनाने की मांग करता रहा है। इस मांग को पूरा करने के लिए यह सही समय है। उन्होंने कहा हम केंद्र से मांग करते हैं कि दार्जिलिंग को भी केंद्र शासित राज्य बनाया जाए जिसमें अलग विधानसभा हो।
अलग राज्य की मांग पर 104 दिन बंद रहा था दार्जिलिंग
जीजेएम महासचिव ने बताया कि दार्जिलिंग ने अलग राज्य की मांग पर जून 2017 में 104 दिन की बंदी का सबसे भयानक दौर देखा है। इस दौरान दार्जिलिंग में हुई भीषण हिंसा में कई लोगों की जान गई थी।