देश इस बार 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के इन वर्षों में देश ने काफी कुछ सहा है। शुरुआत विभाजन की त्रासदी से हुई। देश ने पाकिस्तान और चीन से जंग लड़ी। आपातकाल लगा। साम्प्रदायिक दंगे हुए। बाढ़-सुनामी जैसी आपदाएं आईं और देश ने कोरोना जैसी महामारी का सामना किया। इन घटनाओं का कुछ न कुछ असर भी हुआ। देश पहले से सतर्क-सजग हुआ।
1. विभाजन (1947)
विभाजन की त्रासदी भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। ब्रिटिश शासन ने देश को स्वतंत्रता देने से पहले भारत का सांप्रदायिक आधार पर बंटवारा किया। भारत से अलग होकर पाकिस्तान अलग देश बन गया।
असर:
करोड़ों लोग प्रभावित हुए। करोड़ों दिल रोए, तड़पे। दोनों तरफ भारी हुई हिंसा हुई। अनुमान है कि विभाजन की त्रासदी में करीब 10 लाख लोग मारे गए।
2. चीन-भारत युद्ध (1962)
भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर युद्ध हुआ। चीन ने मैकमोहन रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। एक महीने बाद चीन ने युद्धविराम की घोषणा की। इस जंग में भारत का काफी नुकसान हुआ।
असर:
लोगों का मनोबल बुरी तरह टूट गया। देश भारी निराशा में डूब गया। हम जिसे दोस्त समझ रहे थे, उस चीन की चुनौती का पहली बार देश को एहसास हुआ।
3. भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965)
अभी देश चीन के साथ हुए युद्ध से उबरा नहीं था कि पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। इस युद्ध में दोनों पक्ष को भारी नुकसान हुआ, आखिरकार जीत भारत की हुई। आजादी के बाद यह पाकिस्तान के खिलाफ मिली दूसरी जीत थी।
असर:
देश में चीन से मिली हार की निराशा कम हो गई। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को जनता ने सिर आंखों पर बैठाया।
4. बांग्लादेश की मुक्ति (1971)
पूर्वी पाकिस्तानियों ने पाकिस्तान से आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और भारत ने उनका साथ दिया। इस पर बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए। तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। 26 मार्च 1971 को शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बन गया।
असर:
पाकिस्तान को विभाजन के दर्द का एहसास हुआ। पाकिस्तान को यह साफ हो गया कि भारत से वह कोई जंग नहीं जीत सकता।
5. जेपी आंदोलन (1974)
18 मार्च 1974 को बिहार में छात्रों ने कुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आंदोलन शुरू किया। इसका नेतृत्व समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने किया था। देखते-देखते यह आंदोलन पूरे देश भर में फैल गया। लोगों के मन में इंदिरा गांधी सरकार के प्रति गुस्सा था। जेपी ने इंदिरा गांधी के खिलाफ आवाज उठाई। यह आंदोलन बाद में जेपी आंदोलन के नाम से जाना गया।
असर:
इस आंदोलन के बाद देश को ‘आपातकाल’की सजा भुगतनी पड़ी।
6. आपातकाल (1975)
देश में आंतरिक तनाव के कारण इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल लागू कर दिया। इसकी पृष्ठभूमि में जेपी आंदोलन के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह फैसला था जिसमें इंदिरा गांधी को रायबरेली के चुनाव अभियान में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी पाया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के निर्वाचन को खारिज कर दिया था। साथ ही छह साल तक उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।
इंदिरा गांधी की सिफारिश पर तब के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी। आपतकाल 1975 से 1977 तक रहा।
असर:
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आपातकाल को सबसे काला अध्याय माना गया। इससे नागरिकों के मौलिक अधिकार और स्वतंत्रता पर अंकुश लगा गया। करीब एक हजार विरोधी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया।
7. ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984)
अलग खालिस्तान की मांग कर रहे सिख आतंकवादियों के खिलाफ सेना ने बड़ी कार्रवाई की। 1981 से जरनैल सिंह भिंडरांवाले अमृतसर में सिखों के सबसे पवित्र गुरुद्वारे स्वर्ण मंदिर के पास छुपा था। उसके साथ हथियारबंद अनुयायी भी थे।
एक जून 1984 को सैन्य कार्रवाई हुई। सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर जाकर आंतकियों को मार गिराया। मेजर जनरल बराड़ ने इसकी जिम्मेदारी संभाली। इस कार्रवाई का कोडनेम था ऑपरेशन ब्लू स्टार।
असर:
इस कार्रवाई से कुछ सिखों में इंदिरा सरकार के प्रति गुस्सा भर गया। सेना की ईकाइयों में विरोध के स्वर सामने आने लगे। इसके कुछ ही समय बाद सिख अंगरक्षकों ने इंदिरा गांधी की हत्या कर दी।
8. सिख विरोधी दंगे (1984)
यह भारत के इतिहास की सबसे भयानक घटनाओं में दर्ज है। इंदिरा गांधी की हत्या के एक दिन बाद एक नवंबर 1984 को देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए। नरसंहार में करीब 15 हजार निर्दोष लोगों को मार दिया गया। राजधानी दिल्ली के भी ज्यादातर इलाकों में हत्या और लूटपाट की घटनाएं हुईं। निर्दोष लोगों की दुकानें, घर और गुरुद्वारे लूट लिए गए।
असर: