महाराष्ट्र सरकार ने रंगदारी मामले में नामजद आरोपी बनाए जाने के बाद मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह व एक अन्य पुलिस अधिकारी को निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया की पुलिस महानिदेशक संजय पांडे के इस हफ्ते आए प्रस्ताव के बाद यह कदम उठाया गया है। वहीं, बर्खास्त सहायक निरीक्षक सचिन वाजे की पुलिस हिरासत 15 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।
डीजीपी पांडे ने सितंबर में भी परमबीर सिंह व अन्य अफसरों को निलंबित करने का प्रस्ताव राज्य के गृह विभाग को भेजा था। तब सरकार ने पूरे मामले उनकी भुमिकाओं की जांच कराने के बाद ही फैसला लेने का निर्णय किया था। डीजीपी के नए प्रस्ताव के बाद सरकार ने फिलहाल परमबीर सिंह और उपायुक्त रैंक के एक अधिकारी को निलंबित किया है। इसके अलावा जिन अफसरों के नाम इस मामले में हैं अभी उन्हें निलंबित नहीं किया जा रहा। इससे पहले बुधवार को मजिस्ट्रेट अदालत ने परमबीर सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था। यह सिंह के खिलाफ तीसरा गैर जमानती वारंट था।
वहीं, रंगदारी के ही मामले में मुंबई की स्थानीय अदालत ने बर्खास्त सहायक निरीक्षक सचिन वाजे की पुलिस हिरासत 15 नवंबर तक बढ़ा दी है। वाजे को गोरेगांव थाने में बिल्डर व होटल मालिक बिमल अग्रवाल की शिकायत पर दर्ज मामले के तहत गिरफ्तार किया गया है। पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह भी इस मामले में आरोपी हैं।
क्या है पूरा मामला
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 1 नवंबर को वाजे को रिमांड पर लिया था। हिरासत खत्म होने के बाद उसे शनिवार को कोर्ट में पेश किया और आगे की जांच के लिए उसकी हिरासत 15 नवंबर तक बढ़ाने की मांग की। कोर्ट ने क्राइम ब्रांच की अर्जी स्वीकार कर ली है। एंटीलिया के बाहर बम मिलने और मनसुख हिरेन की हत्या मामले में आईएनए ने वाजे को मार्च में गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में था। अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि जनवरी 2020 से मार्च 2021 के बीच वाजे ने उसके दो बार और रेस्टोरेंट में छापा नहीं मारने के एवज में 9 लाख रुपये की रंगदारी ली थी। इसके अलावा अपने लिए 2.92 लाख रुपये की कीमत के दो स्मार्टफोन भी अग्रवाल से खरीदवाए थे।