कोवाक्सिन के बाद भारत को जल्द ही एक और स्वदेशी टीका मिलने जा रहा है। सरकार ने हैदराबाद स्थित कंपनी बायोलॉजिकल को इसकी 30 करोड़ खुराक की आपूर्ति के लिए 1500 करोड़ अग्रिम भुगतान भी कर दिया है। 'कार्बेवैक्स' टीके का अभी तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। यह स्पाइक प्रोटीन से बनने वाली पहली कोरोना वैक्सीन है जो देश में सबसे सस्ते दामों में उपलब्ध होगी।
जानिए वैक्सीन देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और क्या है इसकी खासियत
कार्बोवेक्स एक रिकॉम्बिंनेंट प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। यह कोरोना वायरस की सतह पर पाए जाने वाले प्रोटीन से बनी है। यह स्पाइक प्रोटीन ही वायरस को शरीर की कोशिकाओं में घुसने में मदद करता है। इसके बाद वायरस अपनी तादाद बढ़ाकर शरीर में संक्रमण फैलाना शुरू करता है।
हालांकि शरीर में सिर्फ चला जाए तो यह हानिकारक नहीं होता, लेकिन हमारा प्रतिरक्षा तंत्र इसे वायरस मानकर ही एंटीबॉडी विकसित करने लगता है। ऐसे तैयार में मदद करती है इसके चलते हमारे गंभीर रूप से बीमार पड़ने की आशंका बहुत कम हो जाती है
इसी तकनीक से बना है हेपेटाइटिस-बी टीका
दशकों से इस तकनीक का इस्तेमाल हेपेटाइटिस-बी के टीके बनाने के लिए किया जा रहा है। इस तरीके से बनने वाली कार्बेवैक्स पहली वैक्सीन होगी। नोवावैक्स ने भी एक प्रोटीन आधारित वैक्सीन विकसित की है, जिसके इस्तेमाल की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
कम लागत वाले तरीके से बनी
अब तक जिन टीको को मंजूरी मिली है। वे एमआरएनए (फाइजर, मॉडर्ना) वायरल वेक्टर (कोविशील्ड, जॉनसन एंड जॉनसन, स्पूतनिक-वी) आधारित है। या इनएक्टिवेटेड वैक्सीन (कोवाक्सीन, सिनोवेक कोरोनावैक) हैं। कार्बेवैक्स एमआरएनए और वायरल वैक्सीन की तरह केवल स्पाइक प्रोटीन को निशाना बनाती है लेकिन तरीका अलग होता है। कोर्बेवैक्स की भी दो खुराक लगवानी होगी। इसे बनाने में कम लागत वाले तरीकों का इस्तेमाल हुआ है। इसलिए यह सबसे सस्ती वैक्सीनों में से एक होगी।