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सीमा पर छिप नहीं सकेगी चीन-पाकिस्तान की कारस्तानी: सटे 16 हजार गांवों में होगी 'टू इन वन' ह्यूमन इंटेलिजेंस

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 22 Nov 2021 04:13 PM IST

सार

'टू इन वन' टीम में अंतरराष्ट्रीय सीमा 'आईबी'/ नियंत्रण रेखा 'एलओसी' व वास्तविक नियंत्रण रेखा 'एलएसी' से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के लोग शामिल होंगे। ऐसे गांवों की संख्या करीब 16 हजार है। यहां के विकास के लिए केंद्र सरकार, राज्यों के साथ मिलकर 'सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम' चलाती है। अब इन्हीं गांव में 'ह्यूमन इंटेलिजेंस' इकाई गठित होंगी...
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डीजीपी सम्मेलन में पीएम मोदी - फोटो : PMO India/twitter


सीमावर्ती इलाकों में सड़कें और बीओपी सीमा चौकियां, कंटीली तार व रोशनी के लिए गत छह वर्षों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 5916.52 करोड़ रुपये, भारत-भूटान सीमा पर 116.47 करोड़ रुपये, भारत-म्यांमार सीमा पर 102.76 करोड़ रुपये व भारत-चीन सीमा के लिए 1908.83 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। बॉर्डर पर मानवीय इंटेलिजेंस जुटाने के लिए 'क्रो-फ्लाई/एरियल डिस्टेंस' वाले इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा लोगों को विकास योजनाओं से जोड़ने के लिए जल्द ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ होगा।

सीमा अवसंरचना और प्रबंधन पर खर्च हुई इतनी राशि

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