रविंद्रन के पिता एस प्रभुदोस एक कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव हैं। उन्होंने बताया कि तीन वर्ष की उम्र में ही उसके जबड़े में सूजन दिखने लगी थी। इसकी कभी जांच नहीं करवाई गई, क्योंकि वह जांच करते समय सहयोग नहीं करता था। इस बार भी सर्जरी के पहले चिकित्सकों और पीजी विद्यार्थियों ने कई घंटे उससे बातचीत कर उसे सर्जरी के लिए राजी किया।
विश्व में पहला मामला
चिकित्सकों के अनुसार यह विश्व का पहला ज्ञात मामला है, जिसमें एक व्यक्ति के मुंह से इतने दांत मिले। इससे पहले मुंबई में एक किशोर के मुंह से 2014 में चिकित्सकों ने 232 दांत निकाले थे। मौजूदा मामले में जबड़े में मिले बैग को पूरी तरह बाहर निकालना सही निर्णय रहा, वरना ऑपरेशन टेबल पर अगर उसे खोला जाता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी, सर्जरी भी जटिल हो जाती।
चिकित्सकों के अनुसार वे इस ‘कंपाउंड कंपोजिट ओडोन्टोमा’ मामले की पुख्ता वजह नहीं बता सकते। हालांकि अनुमान है कि यह मोबाइल टावर रेडिएशन की वजह से हो सकता है। उन्होंने संस्थान द्वारा 250 लोगों पर करवाए जा रहे एक शोध का हवाला दिया जो मोबाइल टावर के निकट रहते हैं। इनमें से 10 प्रतिशत की कुछ कोशिकाओं में बदलाव देखने को मिले हैं। वे इस क्षेत्र में विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताते हैं। वहीं अनुवांशिक वजहों से भी ऐसी अप्राकृतिक वृद्धि हो सकती है।
अब भी बचे हैं 21 दांत
चिकित्सकों ने बताया कि बालक की सर्जरी सही समय पर हुई। अब उसके 21 दांत बचे हैं। दो दाढ़ें नहीं आ सकेंगी, जिसके लिए उसे 16 वर्ष की उम्र में अलग से लगवाने का सुझाव दिया है।